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वनीकरण विभाग में जंगलराज! मजदूरों का वेतन सालों से बकाया, बोर्ड झाड़ियों में गुम – कौन है ज़िम्मेदार?

वनीकरण विभाग में जंगलराज! मजदूरों का वेतन सालों से बकाया, बोर्ड झाड़ियों में गुम

वनीकरण विभाग में जंगलराज! मजदूरों का वेतन सालों से बकाया, बोर्ड झाड़ियों में गुम – कौन है ज़िम्मेदार?

जालना: एक ओर ‘हरित भारत’ का सपना, दूसरी ओर जालना के सामाजिक वनीकरण विभाग में मजदूरों की जिंदगी सूखती हुई झाड़ियों जैसी! विभाग में तैनात सैकड़ों श्रमिक वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं — ना वेतन मिला, ना पहचान, और ऊपर से बदइंतजामी का आलम ये कि खुद विभाग का बोर्ड ही झाड़ियों में गुम हो गया!

2018 से 2024 तक मजदूरों की मेहनत हुई बेकार!

मराठवाडा सर्व श्रमिक संगठन ने 16 जुलाई 2025 को विभागीय वन अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। संगठन के सहसचिव सोहम बोदवडे ने बताया कि अंबड, मंठा, घनसावंगी, जाफ्राबाद सहित कई वनक्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों को 2018 से लेकर आज तक महीनों का वेतन नहीं मिला है। कुछ को तो 2020 से एक भी रुपया नहीं मिला।

शांताबाई पटेकर, भीमराव राठोड, शोभा लिहिणार जैसे कई नाम सामने हैं, जो सालों से पसीना बहा रहे हैं और घर खाली हाथ लौटते हैं। न पहचान पत्र, न हाजिरी मस्टर, और जब वेतन आता भी है, तो बिना किसी हिसाब-किताब के।

वेतन आश्वासन बन गया मज़ाक!

सोहम बोदवडे ने बताया कि 16 दिसंबर 2024 को विभाग ने पत्र जारी कर वेतन भुगतान का वादा किया था जिससे मजदूरों में खुशी की लहर थी। लेकिन वो वादा अब तक फाइलों में ही धूल खा रहा है।

जंगल में बोर्ड खो गया, मजदूर भटक गए!

जालना के सत्कार्य नगर में स्थित वनीकरण विभाग का मुख्य सूचना बोर्ड झाड़ियों और बढ़ी हुई हरियाली के बीच लुप्त हो चुका है। दूर-दराज से आने वाले मजदूर समय पर कार्यालय ढूंढ नहीं पाते, जिससे उनकी उपस्थिति और वेतन पर सीधा असर पड़ रहा है।

यह वही विभाग है जो हरियाली बढ़ाने की ज़िम्मेदारी निभाता है—लेकिन अपने ही परिसर में बढ़ी घास नहीं काट पा रहा!

श्रमिक संगठनों की चेतावनी: अब नहीं रुकेगा आंदोलन!

संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि:

  • लंबित वेतन तुरंत नहीं मिला,
  • पहचान पत्र और मस्टर जारी नहीं किए गए,
  • वेतन वितरण पारदर्शी नहीं बना,
  • बोर्ड साफ व दिशा संकेत नहीं लगाए गए—

तो मजदूर सड़क पर उतरेंगे और विभाग को कानूनी लड़ाई का सामना करना पड़ेगा।

सबसे बड़ा सवाल:

जब हरियाली के रखवाले खुद घास में उलझ जाएं,
जब मजदूर ही सबसे बड़ा शोषित बन जाए,
तो वनीकरण नहीं—विनाश का बीज बोया जा रहा है।
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Rashmi Bagdi
Rashmi Bagdi is a journalist and digital content creator associated with NewsNation Online. She specializes in reporting on local news, civic issues, education, government updates, and viral stories with a reader-focused approach.

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