NewsNation Online

FireFly In News

“चार बांस चौबीस गज…” — पूर्व विधायक गोरंट्याल का दोहा बना मराठवाड़ा की राजनीति में प्रतीकात्मक चेतावनी

💥 “चार बांस चौबीस गज…” — गोरंट्याल का दोहा बना मराठवाड़ा की राजनीति में प्रतीकात्मक चेतावनी!

📍 जालना | 🗓️ दिनांक: 2 जून 2025 | ✍️ विशेष संवाददाता


जालना: पूर्व विधायक कैलाश गोरंट्याल ने सोमवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में राजनीति से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में ऐसा दोहा पढ़ा, जिसने न केवल जालना, बल्कि पूरे मराठवाड़ा और महाराष्ट्र की राजनीति को झकझोर कर रख दिया।

गोरंट्याल ने कहा कि यह दोहा उन जैसे समदुखी नेताओं के लिए है, विशेषकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में हाल ही में शामिल हुए नेताओं को लेकर। उन्होंने परोक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए कहा:

“चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण,
ता ऊपर सुल्तान है, मत चुके चौहान.”

यह ऐतिहासिक दोहा पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी की अंतिम लड़ाई से जुड़ा है। मान्यता है कि जब गौरी ने छलपूर्वक पृथ्वीराज को बंदी बनाकर उनकी आंखें फोड़ दीं, तब भी उन्होंने अपने राजकवि चंदबरदाई की सहायता से शब्दों से दिशा समझकर अंतिम तीर चलाया और गौरी का अंत किया।

इस दोहे के माध्यम से गोरंट्याल ने यह संदेश दिया कि सत्ता में बैठे ‘सुल्तान’ अगर अति आत्मविश्वास में आ जाएं, तो ‘चौहान’ जैसे योद्धा भी जवाब देना जानते हैं। यह व्यंग्य राजनीतिक रूप से तीव्र और प्रतीकात्मक रहा।

🗣️ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि गोरंट्याल का बयान सत्ता पक्ष के लिए एक गंभीर चेतावनी है। जो वक्त की नब्ज नहीं समझता, वह इतिहास में गौरी की तरह पराजित होता है।

यह दोहा अब मराठवाड़ा की राजनीति में बहस का विषय बन चुका है। कुछ इसे विपक्ष की नई रणनीतिक चेतावनी मान रहे हैं, तो कुछ इसे गोरंट्याल के आत्मविश्वास और संघर्ष का प्रतीक बता रहे हैं।

आगामी चुनावी समीकरणों और राजनीतिक गठजोड़ पर इस प्रतीकात्मक दोहे का प्रभाव निश्चित रूप से देखने को मिलेगा।


📢 यह विशेष रिपोर्ट http://www.newsnationonline.com के लिए तैयार की गई है।
🔐 कॉपीराइट © 2025 News Nation Online | All Rights Reserved.

Discover more from NewsNation Online

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

आपके लिए सुझाव

author avatar
Imran Siddiqui

Discover more from NewsNation Online

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading