फर्जी वेबसाइट के जरिए लर्निंग लाइसेंस ठगी का भंडाफोड़
अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश, मुख्य आरोपी वाराणसी से गिरफ्तार
जालना।
सरकारी लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस दिलाने के नाम पर आम नागरिकों से ऑनलाइन ठगी करने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का जालना पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। फर्जी वेबसाइट के माध्यम से सरकारी कंप्यूटर प्रणाली में अवैध रूप से प्रवेश कर लर्निंग लाइसेंस जारी कराने वाले इस रैकेट का खुलासा स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी) और साइबर पुलिस थाना, जालना की संयुक्त कार्रवाई में हुआ है। मामले में नेटवर्क संचालित करने वाले मुख्य आरोपी को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से गिरफ्तार कर जालना लाया गया है, जबकि गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। फर्जी लर्निंग लाइसेंस ठगी.
सरकारी प्रणाली का दुरुपयोग कर की जा रही थी ठगी
इस प्रकरण में 26 नवंबर 2025 को सहायक मोटर वाहन निरीक्षक एवं उप प्रादेशिक परिवहन अधिकारी, जालना द्वारा साइबर पुलिस थाना, जालना में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत के अनुसार, अज्ञात व्यक्तियों ने एक फर्जी वेबसाइट विकसित कर सरकारी कंप्यूटर सिस्टम में अनधिकृत प्रवेश किया और सरकारी प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए नागरिकों को अवैध रूप से लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध कराए। इसके बदले उनसे ऑनलाइन माध्यम से धनराशि वसूली जा रही थी। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई।
तकनीकी जांच से आरोपी तक पहुंची पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक एवं अपर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर स्थानीय अपराध शाखा और साइबर पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई। तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल ट्रेल की जांच में सामने आया कि आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था और उत्तर प्रदेश के महाराजगंज, गोरखपुर और वाराणसी जैसे शहरों में छिपकर रह रहा था। तकनीकी इनपुट के आधार पर यह पुष्टि हुई कि आरोपी फिलहाल वाराणसी में मौजूद है।
वाराणसी से मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी
पुख्ता सूचना के आधार पर 27 जनवरी 2026 को पुलिस टीम ने वाराणसी में दबिश देकर मुख्य आरोपी अमर शिव भारती (उम्र 25 वर्ष) को गिरफ्तार किया। प्रारंभिक जांच में उसका पता काहिलापारा, दिसपुर, गुवाहाटी (असम) बताया गया था, लेकिन आगे की जांच में वह राजमंदिर कलां, तहसील फरेंदा, जिला महाराजगंज (उत्तर प्रदेश) का निवासी निकला। बार-बार स्थान बदलने के कारण आरोपी तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उसे पकड़ने में सफलता हासिल की।
गिरफ्तार आरोपी को 31 जनवरी 2026 को साइबर पुलिस थाना, जालना द्वारा न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे 5 फरवरी 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। फर्जी लर्निंग लाइसेंस ठगी.
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां, नेटवर्क की जांच जारी
इस मामले में इससे पहले कुपवाड़ा (जम्मू-कश्मीर), सहरसा (बिहार) और जालना से तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस को आशंका है कि यह एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह है, जो देश के विभिन्न हिस्सों में फर्जी वेबसाइटों के माध्यम से नागरिकों को ठग रहा था। पुलिस का मानना है कि आगे की जांच में इस रैकेट से जुड़े और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अजयकुमार बंसल, अपर पुलिस अधीक्षक आयुष नोपाणी तथा उपविभागीय पुलिस अधिकारी अनंत कुलकर्णी के मार्गदर्शन में की गई। ऑपरेशन में स्थानीय अपराध शाखा के पुलिस निरीक्षक पंकज जाधव, साइबर पुलिस थाना के पुलिस निरीक्षक गुणाजी शिंदे, सहायक पुलिस निरीक्षक राजेंद्र वाघ, योगेश चव्हाण सहित एलसीबी के पुलिसकर्मी प्रभाकर वाघ, सागर बाविस्कर, इरशाद पटेल, दत्ता वाघुंडे तथा साइबर पुलिस थाना के संदीप मांटे और सचिन चौधरी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फर्जी लर्निंग लाइसेंस ठगी,

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