‘वन नेशन, वन हसबैंड?’ — भगवंत मान की टिप्पणी पर देशभर में विवाद, भाजपा ने बताया पवित्र प्रतीकों का अपमान
स्थान: चंडीगढ़ / नई दिल्ली | तारीख: 4 जून 2025 | रिपोर्ट: न्यूज़ नेशन ऑनलाइन स्पेशल डेस्क
🔸 प्रस्तावना
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर किए गए कटाक्ष — “क्या यह ‘वन नेशन, वन हसबैंड’ योजना है?” — ने देशभर में तीव्र राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया को जन्म दिया है। यह बयान न केवल भाजपा बल्कि विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों की नज़र में अत्यंत आपत्तिजनक ठहरा है।
मान का तंज उस वक्त आया जब केंद्र सरकार की आतंकवाद विरोधी कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भाजपा प्रचार कर रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस सैन्य कार्रवाई का राजनीतिकरण कर रही है और हिंदू महिलाओं के प्रतीक सिंदूर का मज़ाक बना रही है।
🔷 ऑपरेशन सिंदूर: पृष्ठभूमि क्या है?
‘ऑपरेशन सिंदूर’ एक सैन्य कार्रवाई थी जो उन आतंकियों के विरुद्ध चलाई गई जिन्होंने हिंदुओं को उनके धार्मिक प्रतीकों — विशेषकर सिंदूर — के आधार पर निशाना बनाया था। भाजपा का कहना है कि इसका उद्देश्य आतंक के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करना था, न कि किसी धार्मिक भावना का राजनीतिक लाभ लेना।
🔷 भगवंत मान का बयान और विवाद की जड़
“कौन सा पति अपनी पत्नी से कहेगा कि नरेंद्र मोदी के नाम का सिंदूर लगाए? क्या ये ‘वन नेशन, वन हसबैंड’ योजना है?” — भगवंत मान
मुख्यमंत्री के इस बयान ने भाजपा सहित कई राजनीतिक दलों को आक्रोशित कर दिया।
🔷 भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया
🔹 प्रवक्ता प्रीतपाल सिंह बलियावाल का बयान:
“यह बेहद शर्मनाक है। भगवंत मान भारतीय सेना, वीर नारियों और हिंदू संस्कृति का अपमान कर रहे हैं।”
🔹 केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का बयान:
“क्या आप पाकिस्तान के साथ खड़े हैं? प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ ऐसा बयान देश बर्दाश्त नहीं करेगा।”
🔹 भाजपा की सोशल मीडिया रणनीति:
“यह व्यंग्य नहीं, भगवंत मान ने हर सैनिक की विधवा, हर शहीद की मां और भारत की हर महिला का अपमान किया है।”
🔷 विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया
ममता बनर्जी: “पहले चायवाला, फिर गार्ड और अब मोदी सिंदूर बेचने आए हैं।”
संजय सिंह: “अब ‘वन नेशन, वन लीडर’ के बाद ‘वन नेशन, वन हसबैंड’ आ गया है।”
🔷 सामाजिक संगठनों की राय
राष्ट्रीय महिला संगठन: “सिंदूर का मज़ाक भारतीय नारी के आत्मगौरव का अपमान है।”
🔷 विश्लेषण: क्या तंज उचित था?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भगवंत मान की इस तरह की टिप्पणियाँ उन्हें नुकसान पहुँचा सकती हैं और उनकी नेतृत्व छवि को कमजोर कर सकती हैं।
🔷 क्या वाकई भाजपा सिंदूर बांट रही है?
भाजपा ने साफ़ किया है कि ‘हर घर सिंदूर’ कोई आधिकारिक योजना नहीं है। स्थानीय स्तर पर कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए वितरण को संगठन की नीति से जोड़ना गलत है।
🔷 चुनावी प्रभाव
यह विवाद भाजपा के सांस्कृतिक एजेंडे को मजबूती दे सकता है, जबकि आम आदमी पार्टी के लिए यह संकट का कारण बन सकता है।
🔚 निष्कर्ष:
भगवंत मान का ‘वन नेशन, वन हसबैंड’ वाला तंज कॉमिक relief की तरह भले शुरू हुआ हो, लेकिन इसके नतीजे गंभीर हैं। यह बयान राजनीतिक और धार्मिक दोनों मोर्चों पर विवादों का कारण बना है और इसके प्रभाव आगामी चुनावों में महसूस किए जा सकते हैं।
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