NewsNation Online

FireFly In News

पिता द्वारा बेटी से दुष्कर्म: सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखी

पिता द्वारा बेटी से दुष्कर्म: सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखी

पारिवारिक विश्वास का खून: सुप्रीम कोर्ट ने बेटी से बलात्कार करने वाले पिता की उम्रकैद की सजा को सही ठहराया

नई दिल्ली, 6 अगस्त 2025:
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक बेहद संवेदनशील मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि “पिता द्वारा अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ किया गया यौन शोषण ऐसा घिनौना अपराध है, जो पारिवारिक विश्वास की नींव को तोड़ देता है और उसे सबसे कठोर दंड मिलना चाहिए।”

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने हिमाचल प्रदेश के एक व्यक्ति द्वारा 10 वर्षीय बेटी के साथ किए गए बार-बार दुष्कर्म के मामले में सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील को खारिज कर दिया।

“कोई भी बेटी ऐसा आरोप यूं ही नहीं लगाती”

अभियुक्त ने यह तर्क दिया कि पारिवारिक विवादों के कारण उसे झूठा फंसाया गया है। कोर्ट ने इस तर्क को नकारते हुए कहा कि:

“कोई भी बेटी, चाहे वह कितनी भी परेशान क्यों न हो, अपने ही पिता पर इतना गंभीर और शर्मनाक आरोप झूठे रूप में नहीं लगाएगी।”

“पवित्र रिश्ता किया कलंकित”

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि:

“ऐसी घटनाएं केवल कानूनी नहीं बल्कि नैतिक और सामाजिक अपराध भी हैं। यह सबसे पवित्र रिश्ते को गंदा और बदनाम करती हैं।”

मनुस्मृति का उल्लेख: स्त्री सम्मान सर्वोपरि

न्यायालय ने मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए कहा:

“जहां स्त्रियों का सम्मान होता है, वहां देवता निवास करते हैं; और जहां उनका अपमान होता है, वहां सभी कर्म निष्फल हो जाते हैं।”

₹10.5 लाख मुआवजा

कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का प्रयोग करते हुए पीड़िता को ₹10.5 लाख रुपये का मुआवजा हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा महिला पीड़ित मुआवजा योजना 2018 के तहत देने का आदेश भी दिया।

📌 मामले का संक्षिप्त विवरण

विषय जानकारी
मुलजिम नाबालिग लड़की का जैविक पिता
पीड़िता 10 वर्षीय पुत्री
अपराध बार-बार बलात्कार और डराना-धमकाना
कानून POCSO की धारा 6 और IPC की धारा 506
सजा उम्रकैद (Life Imprisonment)
न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार व संदीप मेहता
मुआवजा ₹10.5 लाख पीड़िता को

यह निर्णय भारतीय न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि बच्चों और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आने वाले वर्षों में ‘मिसाल’ के तौर पर देखा जाएगा।


Discover more from NewsNation Online

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

आपके लिए सुझाव

author avatar
NewsNationOnline Team

Discover more from NewsNation Online

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading