‘उदयपुर फाइल्स’ पर रोक से दिल्ली हाईकोर्ट का इनकार, 8 अगस्त को रिलीज को मिली मंजूरी
नई दिल्ली, 7 अगस्त 2025:
दिल्ली हाईकोर्ट ने बहुचर्चित फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स: कन्हैयालाल टेलर मर्डर’ की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के तर्कों में ऐसा कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता जिससे फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई जा सके। अब फिल्म 8 अगस्त 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
क्या था मामला?
याचिका कन्हैयालाल हत्याकांड के एक आरोपी मोहम्मद जावेद द्वारा दायर की गई थी। उनका कहना था कि फिल्म:
- न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है,
- सांप्रदायिक सौहार्द्र को नुकसान पहुंचा सकती है,
- और आरोपी को दोषी के रूप में पेश करती है जबकि मुकदमा लंबित है।
कोर्ट का फैसला
मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि:
- फिल्म को CBFC से प्रमाणन प्राप्त हो चुका है और उसमें 55 कट लगाए गए हैं।
- निर्माताओं ने अतिरिक्त बदलाव भी स्वेच्छा से किए हैं।
- फिल्म की रिलीज में देरी से निर्माताओं को आर्थिक हानि होगी।
सरकार का पक्ष
6 अगस्त को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने सभी पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज करते हुए कहा:
- फिल्म के विवादित अंश पहले ही संपादित किए जा चुके हैं।
- CBFC द्वारा प्रक्रिया के अनुसार प्रमाणन दिया गया है।
- फिल्म को ‘A’ सर्टिफिकेट मिला है, अतः वयस्क दर्शकों के लिए उपयुक्त मानी गई है।
पृष्ठभूमि
यह फिल्म 2022 में उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की हत्या पर आधारित है, जिसे दो युवकों ने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दिनदहाड़े मार डाला था। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
अब तक की कानूनी कार्यवाही
| तारीख | घटना |
|---|---|
| 10 जुलाई 2025 | दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म पर अस्थायी रोक लगाई और याचिकाकर्ताओं को MIB के पास भेजा। |
| 21 जुलाई 2025 | सुप्रीम कोर्ट ने भी अस्थायी रोक जारी रखी और केंद्र से स्पष्टीकरण मांगा। |
| 1 अगस्त 2025 | MIB ने अनुचित रूप से सुझाए गए 6 कट वापस लिए। |
| 6 अगस्त 2025 | MIB ने सभी पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज कर फिल्म को क्लीन चिट दी। |
| 7 अगस्त 2025 | दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म की रिलीज को मंजूरी दी। |
निष्कर्ष
‘उदयपुर फाइल्स’ अब 8 अगस्त को देशभर में रिलीज के लिए तैयार है। फिल्म निर्माता का दावा है कि इसका उद्देश्य सच्चाई को सामने लाना और पीड़ित को श्रद्धांजलि देना है। हालांकि यह देखना शेष है कि सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया कैसी रहती है।
