बिहार SIR विवाद: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने भ्रामक सूचनाओं का खंडन किया
प्रेस कांफ्रेंस की प्रमुख बातें
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चल रहे विशेष गहन मतदाता सूची संशोधन (SIR) को लेकर हुई विवादास्पद आलोचनाओं और भ्रामक सूचनाओं का कड़ा खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता के साथ और संविधान एवं कानून के तहत निष्पक्ष रूप से संचालित हो रही है।
उन्होंने कहा कि सात करोड़ से अधिक मतदाताओं ने मतदाता सूची की जाँच की है और अपनी सहमति के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अतिरिक्त, मतदाता, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और बूथ स्तर अधिकारी (BLO) ने वीडियो साक्ष्य भी प्रस्तुत कर इस प्रक्रिया की सत्यता सिद्ध की है।
भ्रामक सूचनाओं पर कड़ा रुख
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल जानबूझकर इन साक्ष्यों को नजरअंदाज कर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं, जो लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बिना आधार के लगाए जा रहे आरोपों को असत्य बताया और सभी दलों से तथ्यों पर ध्यान देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में त्रुटियां ठीक करने और मृत तथा डुप्लिकेट मतदाताओं को हटाने के लिए यह संशोधन आवश्यक है। किसी भी गलती की सूचना तत्काल चुनाव आयोग को दी जा सकती है, और आयोग उसका उचित निपटान करेगा।
लोकतंत्र की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता
चुनाव आयोग ने विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे गलत दावों के विरुद्ध सोशल मीडिया पर भी सत्यापन अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों और राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे तथ्यात्मक जानकारी को ही स्वीकारें और अफवाहों से बचें।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखना हर नागरिक का अधिकार और दायित्व है। चुनाव आयोग लोकतंत्र की यह रक्षा पूरी ईमानदारी से करेगा ताकि बिहार में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव हो सकें।

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