तेलंगाना में वक्फ पोर्टल को लेकर मुतवल्लियों की उलझन, वक्फ बोर्ड की वैधता पर भी संकट
हैदराबाद: केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए ‘यूएमीद’ (UMEED) पोर्टल को लेकर तेलंगाना के मुतवल्लियों और राज्य वक्फ बोर्ड के बीच गहरी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और पारदर्शिता के उद्देश्य से शुरू किए गए इस पोर्टल के संचालन को लेकर तकनीकी, कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
🌐 पोर्टल क्या है?
‘यूएमीद’ (Unified Waqf Management, Empowerment, Efficiency & Development) पोर्टल को 6 जून 2025 को केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू द्वारा लॉन्च किया गया। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण और प्रबंधन को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाना है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
⚠️ प्रमुख समस्याएं
- तकनीकी अस्पष्टता: दस्तावेजों की अपलोडिंग प्रक्रिया और फॉर्मेट को लेकर वक्फ बोर्ड को स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।
- कानूनी स्थिति: अब तक सिर्फ तीन मुतवल्लियों का पंजीकरण हुआ है। सभी प्रक्रिया को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
- विरोध और याचिका: AIMPLB ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पंजीकरण पर रोक लगाने की मांग की है।
🏛️ वक्फ बोर्ड की वैधता पर संकट
वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के अनुसार, सभी नामांकित सदस्यों की सदस्यता समाप्त मानी जाती है। तेलंगाना वक्फ बोर्ड में 5 नामांकित और 3 निर्वाचित सदस्य हैं, जिससे इसकी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं। राज्य सरकार ने कानूनी सलाह के लिए महाधिवक्ता और विधि विभाग से राय मांगी है।
इस बीच, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष द्वारा बैठक बुलाने के प्रयास पर अधिकारियों ने आपत्ति जताई है और इसे अवैध करार दिया है।
🔍 निष्कर्ष
वक्फ संपत्तियों के डिजिटल प्रबंधन की दिशा में उठाया गया यह कदम अभी कानूनी और तकनीकी उलझनों में उलझा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और राज्य सरकार की स्पष्ट गाइडलाइन आने तक पोर्टल की कार्यवाही पर रोक संभव है।

