भोकरदन से पोंपेई और कोल्हापुर तक — भारत के प्राचीन व्यापार और सांस्कृतिक प्रभाव के जीवंत प्रमाण
Posted on May 20, 2025 | By NewsNationOnline Team
महाराष्ट्र का ऐतिहासिक शहर भोकरदन आज विश्व इतिहास के मानचित्र पर अपनी छाप छोड़ रहा है। यहां से मिली यक्षिणी की मूर्तियां और पोंपेई (इटली) में मिली ‘पोंपेई लक्ष्मी’ मूर्ति भारत और रोमन साम्राज्य के बीच व्यापार के जीवंत प्रमाण हैं।
प्राचीन भारत की वैश्विक व्यापार यात्रा
2000 वर्ष पूर्व, भारत रोमन साम्राज्य के साथ व्यापार करता था। पोंपेई में हाथीदांत से बनी एक मूर्ति की खोज 1938 में हुई जिसे “पोंपेई लक्ष्मी” कहा गया। इसे मथुरा या भोकरदन से लाया गया माना जाता है। साथ में मिले सातवाहन सिक्के इसके प्रमाण हैं।
भारत में रोमन सिक्कों की भरमार
देशभर में 6000 से अधिक रोमन सिक्के मिले हैं — जो भारत की ट्रेड सरप्लस स्थिति को दर्शाते हैं। रोमन इतिहासकार प्लिनी ने लिखा, “रोमन महिलाओं की भारतीय वस्त्रों की दीवानगी के कारण हमें सोना देना पड़ रहा है।”
पश्चिमी तटीय बंदरगाहों की भूमिका
भडोच, नालासोपारा, चौल, कल्याण जैसे बंदरगाह उस युग के अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र थे। इन्हीं बंदरगाहों से मसाले, हाथीदांत, वस्त्र और रत्न विदेश भेजे जाते थे।
G20 में पुनरावृत्ति: IMEEC कॉरिडोर
IMEEC या India-Middle East-Europe Corridor, G20 में प्रस्तुत किया गया — जो भारत के उसी प्राचीन स्पाइस रूट को फिर से जागृत करने की योजना है।
निष्कर्ष
भोकरदन, कोल्हापुर और भारत के बंदरगाह — सब इस बात के साक्षी हैं कि भारत केवल आध्यात्मिक विश्वगुरु नहीं था, बल्कि एक वैश्विक व्यापारी राष्ट्र भी था।


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