NewsNation Online

FireFly In News

जब कुर्सी विनाश का अस्त्र बनती है!

#Iran #America #Israel #Hormuz


सत्ताधारियों का ‘मतिभ्रम’ और दुनिया का ‘रक्तपात’: जब कुर्सी विनाश का अस्त्र बनती है!

हाल ही में सोमालिया के सैन्य प्रमुख की ओर से सामने आई मांग—जिसमें उन्होंने तुर्की से ‘एक अरब डॉलर और सुंदर युवतियों’ की मांग की—यह घटना भले ही ऊपर से हास्यास्पद लगे, लेकिन यह एक भीषण वास्तविकता की ओर इशारा करती है। जब देश की रक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रमुख अपनी व्यक्तिगत वासनाओं और अतार्किक मांगों के लिए देश को दांव पर लगा देते हैं, तब उस राष्ट्र के पतन की शुरुआत होती है। लेकिन यह समस्या केवल एक देश तक सीमित नहीं है; आज दुनिया भर के कई शक्तिशाली राष्ट्रों के प्रमुख अपने ‘सनकी’ निर्णयों के कारण विश्व को तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर ले जा रहे हैं।

1. सत्ता का उन्माद या मानसिक अस्थिरता?

इतिहास पर नजर डालें तो दिखता है कि सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर बैठने के बाद कई नेताओं को लगने लगता है कि वे ईश्वर से भी श्रेष्ठ हैं। सोमालिया के सैन्य प्रमुख की धमकी हो या उत्तर कोरिया के किम जोंग उन का परमाणु शक्ति प्रदर्शन, इन सबके पीछे एक ही सुप्त भावना है: “मैं जो कहूं, वही सही है।” जब कोई प्रमुख खुद को कानून और मानवीय मूल्यों से ऊपर समझने लगता है, तब वह जनहित के बजाय अपने अहंकार को महत्व देने लगता है।

2. ट्रम्प कार्ड और वैश्विक अस्थिरता

डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल का उदाहरण लें, तो उनके कई ‘अनप्रिडिक्टेबल’ (अनिश्चित) निर्णयों ने वैश्विक राजनीति के समीकरण बदल दिए। उनकी कार्यशैली के कारण मित्र राष्ट्र दूर हो गए और शत्रु राष्ट्रों के साथ संबंध और बिगड़ गए। ‘पहले मेरा देश और मेरा अहंकार’ की नीति के कारण कई वैश्विक समझौते टूट गए। ट्रम्प जैसे नेताओं के कारण दुनिया ने देखा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी किस तरह एक ‘लोकप्रिय तानाशाही’ जन्म ले सकती है।

3. ईरान-इजरायल युद्ध: दो ‘ईगो’ के बीच संघर्ष

वर्तमान में मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में लगी ईरान और इजरायल के संघर्ष की आग भी सत्ताधारियों की जिद का ही परिणाम है। बेंजामिन नेतन्याहू पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप और सत्ता बचाने की जद्दोजहद, तो दूसरी ओर ईरान के धार्मिक नेताओं की कट्टरता—इन दो चरमपंथी भूमिकाओं के कारण निर्दोष नागरिक मारे जा रहे हैं।

  • इजरायल: अपने अस्तित्व के नाम पर आक्रामक विस्तारवाद।
  • ईरान: वैचारिक वर्चस्व सिद्ध करने के लिए मिसाइलों का उपयोग।

इन दोनों के संघर्ष में वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा रही है, तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और एक बार फिर परमाणु हथियारों का डर दिखाया जा रहा है।

4. दुनिया को भुगतने पड़ने वाले परिणाम

जब किसी देश का प्रमुख ‘पागलों’ की तरह व्यवहार करने लगता है, तो उसके परिणाम आम जनता को भुगतने पड़ते हैं:

  • आर्थिक मंदी: युद्ध के खर्च के कारण विकास कार्यों में बाधा आती है।
  • मानवीय संकट: लाखों लोग शरणार्थी बन जाते हैं।
  • पर्यावरण की हानि: आधुनिक हथियारों के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाता है।

निष्कर्ष

“सत्ता मनुष्य को भ्रष्ट करती है और निरंकुश सत्ता मनुष्य को पूर्णतः भ्रष्ट कर देती है,” यह कथन आज की वैश्विक स्थिति पर सटीक बैठता है। सोमालिया के सैन्य प्रमुख की विचित्र मांग केवल एक व्यक्ति की विकृति नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति में घर कर चुकी ‘सत्तांध’ (सत्ता की अंधी) मानसिकता का लक्षण है। जब तक आम जनता ऐसे सिरफिरे नेताओं के हाथों में सत्ता सौंपती रहेगी या उनसे जवाब नहीं मांगेगी, तब तक शांति केवल किताबों तक ही सीमित रहेगी।

समय आ गया है कि दुनिया अब हथियारों के बजाय विवेक को महत्व देने वाले नेतृत्व की तलाश करे, अन्यथा एक सिरफिरे का एक गलत फैसला पूरी पृथ्वी का विनाश करने के लिए पर्याप्त है।


World globe at center surrounded by tangled gears and flames, symbolizing power, oil, ideology, and resources fueling conflict, with rockets and missiles overhead.
CHAIR IS SYMBOL OF POWER

Discover more from NewsNation Online

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

आपके लिए सुझाव

author avatar
Shyam Saraswat
"I have been an Indian professional for 25 years and a writer by passion. I focus on public issues that the average citizen, caught up in daily life, fails to raise. I see it as my duty to be a voice for the people and their concerns."

Discover more from NewsNation Online

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading