उच्चशिक्षित युवती ने पोल्ट्री फार्मिंग से बदली तकदीर, 10 महीनों में 26 लाख की कमाई
जालना | विशेष रिपोर्ट (NewsNationOnline.com)
महाराष्ट्र के जालना जिले के गोलापांगरी गांव की रहने वाली अंकिता मोरे पाटिल ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही दिशा, मेहनत और नवाचार हो तो खेती से जुड़ा व्यवसाय भी लाखों की कमाई दे सकता है। बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी करने के बाद एलएलबी कर रहीं अंकिता ने नौकरी की बजाय स्वरोजगार को चुना और आज वह कुक्कुट पालन (पोल्ट्री फार्मिंग) के जरिए न सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं।
महज 10 महीनों में उन्होंने करीब 26 लाख रुपये की आय अर्जित कर एक सफल मॉडल खड़ा किया है, जिसे अब देशभर में सराहा जा रहा है।
कोविड संकट बना अवसर
साल 2020 में जब पूरा देश कोविड-19 महामारी के कारण लॉकडाउन से जूझ रहा था, तब अंकिता ने इस कठिन समय को अवसर में बदलने का निर्णय लिया। घर पर रहते हुए उन्होंने कुछ नया करने की योजना बनाई और परिवार के सहयोग से पोल्ट्री फार्मिंग की शुरुआत की।
उन्होंने अपनी 35 एकड़ पैतृक जमीन का उपयोग करते हुए कृषि के साथ एक पूरक व्यवसाय जोड़ा, जिससे आय के नए स्रोत तैयार हुए।
खाली गोठे से शुरू हुआ सफल बिजनेस मॉडल
अंकिता के पास शुरुआत में एक खाली पशुशाला (गोठा) था, जिसे उन्होंने पोल्ट्री शेड में बदल दिया। धीरे-धीरे पक्षियों की संख्या बढ़ने पर उन्होंने कम लागत में दूसरा शेड तैयार किया।
उनका फोकस शुरू से ही कम लागत और अधिक उत्पादन पर रहा, जो उनके बिजनेस की सफलता का मुख्य कारण बना।
खुद तैयार किया फीड, घटाया 50% खर्च
अंकिता ने शुरुआत केवल 500 मुर्गियों से की थी, लेकिन उन्होंने बाहरी विशेषज्ञों पर निर्भर रहने के बजाय खुद ही वैक्सीनेशन और देखभाल का काम संभाला।
महंगे बाजारू चारे की जगह उन्होंने खुद का फीड फॉर्मूला तैयार किया, जिसमें मक्का, डीओसी और 50% हरा चारा (शेवगा, लौकी, लहसुन घास) शामिल है। इससे उनके उत्पादन की लागत लगभग 50% तक कम हो गई।
उन्होंने फ्री-रेंज मॉडल अपनाया, जिसमें मुर्गियों को खुले में छोड़ा जाता है। इससे मुर्गियां प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रहती हैं और अंडों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
5000 मुर्गियों का फार्म, लाखों की आय
आज अंकिता के फार्म में करीब 5000 देशी मुर्गियां हैं। उनके व्यवसाय का आर्थिक विवरण इस प्रकार है:
- कुल निवेश: ₹10 लाख
- कुल आय: ₹26 लाख (10 महीनों में)
- अंडे की कीमत (स्थानीय बाजार): ₹15–19
- अंडे की कीमत (निर्यात): ₹50–80
- मुर्गी बिक्री दर: ₹700 प्रति नग/किलो
यह मॉडल छोटे किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए बेहद लाभदायक साबित हो सकता है।
27 हजार किसानों को दिया प्रशिक्षण
अंकिता मोरे ने अपनी सफलता को समाज तक पहुंचाने का भी कार्य किया है। उन्होंने एक इंटीग्रेटेड फ्री-रेंज पोल्ट्री मॉडल विकसित किया और पिछले 3–4 महीनों में 27,000 से अधिक किसानों को मार्गदर्शन दिया।
वह ICAR, कृषि विज्ञान केंद्र और BAIF जैसी संस्थाओं के सहयोग से विशेष रूप से महिला किसानों को मुफ्त प्रशिक्षण भी दे रही हैं।
👉 पोल्ट्री फार्मिंग और कृषि से जुड़े अन्य सफल मॉडल पढ़ने के लिए विजिट करें:
https://www.newsnationonline.com/agriculture (Internal Link)
👉 पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए देखें:
https://icar.org.in (External Link)
अंकिता मोरे का संदेश
अंकिता का मानना है कि खेती के साथ पूरक व्यवसाय अपनाना समय की जरूरत है। उनका कहना है:
“अगर सही योजना, तकनीक और मेहनत हो तो खेती से जुड़ा कोई भी व्यवसाय लाभदायक हो सकता है। मैंने खुद फीड तैयार कर खर्च कम किया और मुनाफा बढ़ाया। आत्मविश्वास और जिद के साथ कोई भी व्यक्ति शून्य से शुरुआत कर सफलता हासिल कर सकता है।”
ग्रामीण युवाओं के लिए सीख
अंकिता मोरे की सफलता कहानी यह दर्शाती है कि आज के दौर में एग्री-बिजनेस और पोल्ट्री फार्मिंग जैसे क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
👉 यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो नौकरी के बजाय खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं।


