जालना: 4 सितंबर को विश्व लैंगिक स्वास्थ्य दिवस पूरे विश्व में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को लैंगिक स्वास्थ्य, शिक्षा और जागरूकता के प्रति प्रोत्साहित करना है। मानसोपचार विशेषज्ञ डॉ. सूरज राजेश सेठिया ने इस अवसर पर कहा कि लैंगिक स्वास्थ्य की जानकारी लेना हर व्यक्ति का मूलभूत अधिकार है।

डॉ. सेठिया ने बताया कि गलत जानकारी, सामाजिक दबाव और शर्म के कारण लाखों लोग इस विषय पर चुप रहते हैं। सही शिक्षा, संवाद और आसानी से उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाएं ही इस चुनौती का समाधान है। इस वर्ष का विषय “लैंगिक न्याय: हम क्या कर सकते हैं?” है। इसका उद्देश्य सभी को अपने शरीर, लैंगिकता और प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में स्वतंत्र और सुरक्षित निर्णय लेने की शक्ति और संसाधन उपलब्ध कराना है।

भारत में लैंगिक शिक्षा की स्थिति

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2024 के अनुसार, भारत में 67 प्रतिशत वयस्कों को उचित लैंगिक शिक्षा नहीं मिली है, और हर तीन में से एक जोड़े को लैंगिक समस्या, नपुंसकता या मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। लेकिन शर्म और संकोच के कारण कई लोग उपचार नहीं कराते।

खुला संवाद क्यों जरूरी है

डॉ. सेठिया ने जोर देकर कहा कि लैंगिक स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा करने से केवल रोग ही नहीं टाले जाते, बल्कि रिश्ते मजबूत होते हैं, मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है और समाज अधिक संवेदनशील बनता है।

लैंगिक स्वास्थ्य की सही परिभाषा

उन्होंने स्पष्ट किया कि लैंगिक स्वास्थ्य केवल प्रजनन तक सीमित नहीं है। इसमें शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक संतुलन, सुरक्षा और आत्मविश्वास भी शामिल है। यह केवल सेक्स या प्रजनन से संबंधित नहीं है, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा है।

शिक्षा और जागरूकता की आवश्यकता

डॉ. सेठिया ने समाज के सभी वर्गों से आग्रह किया कि घरों, स्कूलों और समुदायों में इस विषय पर खुला संवाद किया जाए। सही जानकारी और मार्गदर्शन हर उम्र के लोगों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। गलत या अपूर्ण जानकारी से भ्रम और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं।

संवेदनशील समाज के निर्माण का अवसर

डॉ. सेठिया ने कहा कि लैंगिक स्वास्थ्य पर चर्चा करना अश्लीलता नहीं है। यह संवाद स्वास्थ्य, संबंध और मानसिक संतुलन सुधारने के लिए आवश्यक है। यह केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और संवेदनशील समाज के निर्माण का अवसर है।

संदेश स्रोत: डॉ. सूरज राजेश सेठिया | विश्व लैंगिक स्वास्थ्य दिवस 2025