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“लालच बुरी बला है”! ‘खरात’ तो बस एक जरिया है; असली गुनहगार तो ‘मुफ्तखोरी’ की प्रवृत्ति है!

“Greed is a curse”!

‘खरात’ तो बस एक जरिया है; असली गुनहगार तो ‘मुफ्तखोरी’ की प्रवृत्ति है!

वर्तमान में सोशल मीडिया से लेकर चौराहों की चर्चाओं तक ‘खरात’ नाम का मामला छाया हुआ है। कोई उसे ‘चोर को लूटने वाला चोर’ कह रहा है, तो कोई उसे अन्याय के विरुद्ध लड़ने वाला नया ‘रॉबिन हुड’ साबित करने पर तुला है। लेकिन, इस हंगामे के बीच हम एक भयानक सामाजिक वास्तविकता को आसानी से भूल रहे हैं—वह है, ऐसे ‘खरातों’ के पास कतार लगाने वाली और बिना मेहनत के अमीर बनने का सपना देखने वाली ‘मुफ्तखोर प्रवृत्ति’

लालच का अंधा खेल

खरात ने किसे लूटा? उन लोगों को, जिन्हें मेहनत से ज्यादा ‘शॉर्टकट’ पर भरोसा था। जब कोई व्यक्ति आपसे कहता है कि “दो के चार होंगे” या “बिना मेहनत के पैसा मिलेगा”, तब क्या आपकी बुद्धि गिरवी रख दी जाती है? असल में, धोखाधड़ी करने वाला जितना दोषी होता है, उतना ही अपनी लालच के कारण उसके जाल में फंसने वाला ‘धोखा खाने वाला’ भी दोषी होता है। अपनी मेहनत की कमाई को ऐसे संदिग्ध रास्तों पर निवेश करना, निवेश नहीं बल्कि शुद्ध ‘लालच’ है।

नायक बनाने की गलती न करें

खरात को ‘रॉबिन हुड’ का आभा मंडल देना समाज की दूसरी बड़ी गलती है। चोर के घर चोरी करने से कोई समाज सेवक नहीं बन जाता। वह केवल एक बड़ी श्रृंखला की एक कड़ी मात्र है। लेकिन उससे भी बुरे वे लोग हैं, जो अपनी तिजोरियां भरने के लिए ऐसे लोगों का सहारा लेते हैं। जिनकी प्रवृत्ति ही ‘मुफ्त का पाने’ की होती है, वे लोग समाज के नैतिक पतन का कारण बनते हैं। ऐसे लोगों की वजह से ही भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का बाजार फलता-फूलता है।

वास्तविकता का आईना

इस पूरे मामले ने समाज को एक कड़वा आईना दिखाया है। जिनके पास चोरी हुई, उन्होंने वह पैसा कहाँ से और कैसे लाया था? यदि वह पैसा ईमानदारी की कमाई का होता, तो वह ऐसे जुए के रास्तों पर कभी नहीं मुड़ता। जैसे कहा जाता है “चोर की दाढ़ी में तिनका”, वैसे ही “लालची लोगों के मन में खरात” होता है। आज खरात का पर्दाफाश हुआ इसलिए सच्चाई सामने आई, अन्यथा यह ‘पाप’ चुपचाप जारी ही रहता।

आत्मचिंतन का समय

जब तक समाज में ‘लालच’ और ‘बिना मेहनत के पाने की प्रवृत्ति’ जीवित है, तब तक खरात जैसे लोग पैदा होते ही रहेंगे। खरात को दोष देकर या उसका महिमामंडन करके यह समस्या हल नहीं होगी। प्रश्न तब हल होगा जब आम आदमी यह समझ जाएगा कि—मेहनत के बिना मिलने वाला पैसा केवल एक मृगतृष्णा है।
जिस दिन समाज से ‘मुफ्तखोरी की प्रवृत्ति’ खत्म हो जाएगी, उसी दिन धोखाधड़ी की यह दुकान हमेशा के लिए बंद हो जाएगी। तब तक हम केवल एक चोर द्वारा दूसरे चोर को लूटने की कहानियाँ सुनते रहेंगे और समाज के रूप में पतन की
ओर बढ़ते रहेंगे।

Crowd of protesters reaches toward a stone monument with Hindi inscriptions as a giant fist rises from cracked ground on the left.
Greed is a curse

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Shyam Saraswat
"I have been an Indian professional for 25 years and a writer by passion. I focus on public issues that the average citizen, caught up in daily life, fails to raise. I see it as my duty to be a voice for the people and their concerns."

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