रसायन-मुक्त खेती के लिए कृषि के साथ डेयरी व्यवसाय जरूरी : राज्यपाल हरिभाऊ बागडे
कृषिरत्न विजय अण्णा बोराडे को ‘जालना गौरव’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया
जालना | प्रतिनिधि
राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि वर्तमान समय में लोगों की प्राथमिकता रसायन-मुक्त सब्जियां और खाद्यान्न बन गई है। ऐसे में किसानों को पारंपरिक खेती को मजबूत करते हुए कृषि के साथ डेयरी व्यवसाय को भी बढ़ावा देना चाहिए, ताकि खेती टिकाऊ और लाभकारी बन सके।
उन्होंने कहा कि यदि किसान पशुपालन को अपनाते हैं तो गोबर का उपयोग जैविक खाद के रूप में किया जा सकता है, जिससे खेती में रासायनिक उर्वरकों की निर्भरता कम होगी और भूमि की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहेगी।
राज्यपाल बागडे शुक्रवार (6 मार्च) को जालना स्थित जेईएस महाविद्यालय के सभागार में आयोजित एक सम्मान समारोह में बोल रहे थे। इस अवसर पर कृषि और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले कृषिरत्न विजय अण्णा बोराडे को राज्यपाल के हाथों “जालना गौरव” पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
यह कार्यक्रम जालना वरिष्ठ नागरिक मंच, वरिष्ठ नागरिक महिला मंच और किसान मंच, जिला जालना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
समारोह में कई गणमान्य अतिथि रहे उपस्थित
इस सम्मान समारोह में महाराष्ट्र वरिष्ठ नागरिक संघ के उपाध्यक्ष अशोक तेरकर तथा महिला मोर्चा अध्यक्ष एवं प्राचार्य डॉ. निर्मलाताई भोसकर-कोरे प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक क्षेत्रों से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भी भाग लिया।
रसायन-मुक्त कृषि की आवश्यकता पर दिया जोर
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने अपने संबोधन में कहा कि
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार हर आठ व्यक्तियों में से एक व्यक्ति कैंसर से प्रभावित पाया जा रहा है।
इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि:
- रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहा है
- किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर बढ़ना चाहिए
- पारंपरिक खेती के तरीके भूमि की गुणवत्ता बनाए रखने में अधिक प्रभावी हैं
उन्होंने कहा कि बैलों से की जाने वाली जुताई मिट्टी की संरचना को सुरक्षित रखती है, जबकि अत्यधिक मशीनों के उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक गुणवत्ता प्रभावित होती है।
राजस्थान सरकार किसानों को दे रही आर्थिक सहायता
राज्यपाल बागडे ने बताया कि राजस्थान सरकार बैल पालने वाले किसानों को प्रति वर्ष 30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देती है। इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक खेती और पशुपालन को प्रोत्साहित करना है।
उन्होंने कहा कि लगातार भूमि के छोटे-छोटे हिस्सों में बंटने और रासायनिक छिड़काव के बढ़ते उपयोग के कारण:
- जमीन की उर्वरता कम हो रही है
- कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा है
- किसानों की लागत बढ़ रही है
इसलिए कृषि और पशुपालन को साथ लेकर चलना समय की आवश्यकता है।
दूध उत्पादन में भारत दुनिया में पहले स्थान पर
राज्यपाल ने कहा कि दूध उत्पादन के क्षेत्र में भारत विश्व में प्रथम स्थान पर है। ऐसे में किसानों को अपनी आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ डेयरी व्यवसाय को भी अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसान पशुपालन को बढ़ावा देते हैं तो:
- जैविक खाद आसानी से उपलब्ध होगी
- खेती की लागत कम होगी
- किसानों की आय में वृद्धि होगी
भारत में डेयरी क्षेत्र से जुड़ी जानकारी के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट भी देखी जा सकती है:
https://www.nddb.coop
शिक्षा व्यवस्था पर भी जताई चिंता
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने शिक्षा व्यवस्था पर भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही ज्ञान और तकनीक की समृद्ध परंपरा रही है, लेकिन वह केवल ग्रंथों तक सीमित रह गई।
उन्होंने कहा कि आज कई विद्यार्थी दसवीं कक्षा तक उत्तीर्ण हो जाते हैं, लेकिन उनकी बौद्धिक नींव उतनी मजबूत नहीं बन पाती। ऐसे में शिक्षकों और प्राध्यापकों को विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता विकसित करने पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
भारत में कृषि से संबंधित नीतियों और योजनाओं की जानकारी के लिए
भारत सरकार के कृषि मंत्रालय की वेबसाइट भी देखी जा सकती है:
https://agricoop.nic.in
वरिष्ठ नागरिक मंच के सामाजिक कार्यों की जानकारी
कार्यक्रम की शुरुआत में मंच के सचिव प्रो. राजकुमार बुलबुले ने प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए जालना वरिष्ठ नागरिक मंच द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिए चलाए जा रहे विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों की जानकारी दी।
इसके बाद अशोक तेरकर और डॉ. निर्मलाताई भोसकर-कोरे ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर विजय अण्णा बोराडे के सामाजिक और कृषि क्षेत्र में किए गए कार्यों पर आधारित एक लघु चलचित्र भी प्रदर्शित किया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा।
कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन
कार्यक्रम का संचालन मंच के कार्याध्यक्ष प्रो. डॉ. रावसाहेब ढवले ने किया, जबकि वरिष्ठ सदस्य प्रकाश गडवे ने आभार व्यक्त किया।
समारोह में सांसद डॉ. कल्याण काले, पूर्व विधायक कैलास गोरंट्याल, विलास खरात, द्वारकाभाऊ पाथ्रीकर, बैरिस्टर गांधी, नानासाहेब देशमुख, राजाभाऊ देशमुख, भास्कर अंबेकर और सुनील रायठ्ठा सहित विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक, वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
बॉक्स : समाजसेवा में सभी का सहयोग मिला — विजय अण्णा बोराडे
सम्मान प्राप्त करने के बाद विजय अण्णा बोराडे ने कहा कि उनके परिवार में राजनीति और समाजसेवा की परंपरा रही है। हालांकि राजनीति में उनका मन नहीं लगा, इसलिए वे पारिवारिक राजनीतिक विरासत को आगे नहीं बढ़ा सके।
उन्होंने कहा कि समाजसेवा के कार्यों में उन्हें समाज के सभी लोगों का भरपूर सहयोग मिला।
उन्होंने यह भी कहा कि यह सम्मान किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
बोराडे ने वरिष्ठ नागरिक मंच द्वारा किए गए सम्मान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सम्मान मिलने से जिम्मेदारी बढ़ जाती है और व्यक्ति को हमेशा जमीन से जुड़े रहकर समाज के लिए काम करते रहना चाहिए।

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