जालना में 21वें रमजान की रूहानी शाम: हजरत जानुल्लाह शाह बाबा दरगाह के दस्तरखान पर हजारों रोजेदारों ने किया सामूहिक इफ्तार
जालना: जालना 21 रमजान इफ्तार
मुकद्दस रमजान महीने की बरकतों के बीच जालना शहर में 21वें रमजान की शाम एक बेहद रूहानी और यादगार माहौल में गुजरी। शहर की ऐतिहासिक और मशहूर दरगाह हजरत जानुल्लाह शाह बाबा पर हर साल की तरह इस साल भी बड़े पैमाने पर सामूहिक इफ्तार का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों रोजेदारों ने एक साथ बैठकर रोजा खोला और अल्लाह की बारगाह में दुआएं मांगीं।
दरगाह शरीफ के विशाल दस्तरखान पर मगरिब की अज़ान के साथ ही रोजेदारों ने खजूर और पानी से रोजा खोला। इस दौरान दरगाह परिसर में इबादत, अकीदत और भाईचारे का खूबसूरत माहौल देखने को मिला। जालना शहर के अलावा आसपास के गांवों और जिलों से भी बड़ी संख्या में अकीदतमंद दरगाह पर पहुंचे और इस रूहानी कार्यक्रम में शामिल हुए।

जालना शहर की पहचान से जुड़ी है दरगाह
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार जालना शहर का नाम भी हजरत जानुल्लाह शाह बाबा की पवित्र शख्सियत से जुड़ा हुआ माना जाता है। इसी वजह से 21वें रमजान के दिन दरगाह पर होने वाला यह आयोजन शहर के धार्मिक और सामाजिक जीवन में विशेष महत्व रखता है।
दरगाह में इस दिन को एक तरह से खास उर्स के रूप में भी माना जाता है। इसलिए हर साल हजारों लोग यहां हाजिरी देने आते हैं और बाबा की दरगाह पर फातिहा पढ़कर अमन और खुशहाली की दुआ करते हैं।
दरगाह और उससे जुड़े इतिहास के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया पर भी पढ़ सकते हैं:
https://en.wikipedia.org/wiki/Jalna,_Maharashtra

हाथ से लिखी कुरान शरीफ के दीदार का मिलता है अवसर
21वें रमजान के दिन का एक और खास पहलू यह है कि इस दिन हजरत जानुल्लाह शाह बाबा द्वारा अपने हाथों से लिखी गई पवित्र कुरान शरीफ के दीदार का मौका मिलता है।
बताया जाता है कि यह कुरान शरीफ दरगाह की सबसे अनमोल और ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। साल में केवल इसी दिन इसे लोगों के दीदार के लिए रखा जाता है। इसलिए दूर-दूर से अकीदतमंद दरगाह पहुंचते हैं और इस मुबारक अमानत के दीदार कर खुद को खुशकिस्मत समझते हैं।
कुरान शरीफ और इस्लाम में इसके महत्व के बारे में अधिक जानकारी के लिए यह लेख पढ़ा जा सकता है:
https://en.wikipedia.org/wiki/Quran
हजरत अली (रज़ि.) की याद में शुरू हुई परंपरा
दरगाह के खादिम मोहम्मद जावेद मोहम्मद यूसुफ ने बताया कि हजरत जानुल्लाह शाह बाबा के समय से ही दरगाह में लंगर और रमजान के दौरान सामूहिक इफ्तार का सिलसिला चला आ रहा है।
उन्होंने बताया कि 21 रमजान को हजरत अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) का विसाल का दिन भी माना जाता है। इसी वजह से हजरत जानुल्लाह शाह बाबा ने अपने दौर में जालना में 21वें रमजान के दिन बड़े पैमाने पर इफ्तार कराने की परंपरा शुरू की थी।
तब से लेकर आज तक यह परंपरा लगातार जारी है और हर साल हजारों लोग इस दस्तरखान पर बैठकर रोजा खोलते हैं।
हजरत अली (रज़ि.) के बारे में अधिक जानकारी यहां पढ़ सकते हैं:
https://en.wikipedia.org/wiki/Ali

बड़ी संख्या में पहुंचे अकीदतमंद
21वें रमजान के इस खास मौके पर जालना शहर के साथ-साथ आसपास के कई गांवों और जिलों से भी बड़ी संख्या में अकीदतमंद दरगाह पहुंचे। लोगों ने बाबा की दरगाह पर फातिहा पढ़ी और देश में अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ की।
इस दौरान दरगाह परिसर में लंगर और इफ्तार की बेहतरीन व्यवस्था की गई थी, जिससे सभी रोजेदार आराम से बैठकर इफ्तार कर सके।
लोगों से की गई शामिल होने की अपील
दरगाह स्थित मस्जिद के इमाम हाफिज अनीस, दरगाह के खादिम मोहम्मद जावेद, शेख उरुज मैकेनिक सहित अन्य जिम्मेदार लोगों ने अधिक से अधिक अकीदतमंदों से इस रूहानी आयोजन में शामिल होने और दुआओं में शरीक होने की अपील की।
21वें रमजान की इस रूहानी शाम ने जालना शहर में एक बार फिर मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम दिया, जहां हजारों लोग एक ही दस्तरखान पर बैठकर रोजा खोलते नजर आए।

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