जालना में इफ्तार कार्यक्रम से दिया गया सामाजिक सौहार्द का संदेश
“एक-दूसरे के त्योहारों में भागीदारी से ही मजबूत होती है राष्ट्रीय एकता” — मुफ्ती अब्दुल रहमान
जालना, महाराष्ट्र:
पवित्र माह रमजान के अवसर पर जालना के राष्ट्रमाता इंदिरा गांधी महाविद्यालय में आयोजित इफ्तार कार्यक्रम ने सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। इस कार्यक्रम में विभिन्न समुदायों के लोगों ने एक साथ शामिल होकर यह संदेश दिया कि देश की मजबूती आपसी सम्मान और सहभागिता से ही संभव है।
इस अवसर पर इस्लामिक विद्वान मुफ्ती अब्दुल रहमान ने कहा कि वर्तमान समय में समाज में नफरत और वैमनस्य फैलाने की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन ऐसे माहौल में इस तरह के कार्यक्रम आपसी प्रेम और भाईचारे की मिसाल पेश करते हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल इफ्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि जब लोग एक-दूसरे के त्योहारों, खुशियों और प्रार्थनाओं में दिल से शामिल होते हैं, तभी सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।
महाविद्यालय में हुआ सामूहिक इफ्तार कार्यक्रम
यह कार्यक्रम सोमवार (9 मार्च) को आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. नारायणराव मुंढे ने की। कार्यक्रम में भगवान शिक्षण प्रसारक मंडल के उपाध्यक्ष सत्संग मुंढे, सचिव सुघोष मुंढे, महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सुनंदा तिडके तथा उर्दू विभाग की प्रमुख डॉ. आलिया कौसर पठान विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हुए। इफ्तार के बाद महाविद्यालय परिसर में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सामूहिक रूप से नमाज भी अदा की।
इस अवसर पर मिर्जा अफसर बेग, इकबाल कुरेशी, फिरोज बागवान, शेख महमूद, बासिद कुरेशी और शेख अफसर सहित मुस्लिम समाज के कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। इसके अलावा महाविद्यालय तथा आश्लेषा इंग्लिश स्कूल के शिक्षक, प्राध्यापक और गैर-शिक्षकीय कर्मचारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
रोजे का उद्देश्य आत्मसंयम और मानवता की भावना
अपने संबोधन में मुफ्ती अब्दुल रहमान ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति केवल इमारतों, सड़कों या संसाधनों से नहीं होती, बल्कि वहां रहने वाले लोगों के आपसी भाईचारे और सम्मान से होती है।
उन्होंने कहा कि सभी धर्मों की मूल भावना प्रेम, करुणा और मानवता है। रमजान का रोजा केवल भूख और प्यास सहने का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, धैर्य और गरीबों के दर्द को समझने का माध्यम भी है।
रमजान और रोजे की परंपरा के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां पढ़ें:
सभी धर्म मानवता का संदेश देते हैं
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. नारायणराव मुंढे ने कहा कि सभी धर्मों का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने रोजे के महत्व और त्याग की भावना को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि इस इफ्तार कार्यक्रम के माध्यम से विभिन्न समुदायों के लोग एक साथ आए हैं, जो सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की एक सुंदर मिसाल है।
वहीं सत्संग मुंढे ने कहा कि कुरान, गीता और बाइबल जैसे सभी धर्मग्रंथ मानवता, प्रेम और सम्मान का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्रीधारी छात्र तैयार करना नहीं है, बल्कि ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है जो समाज और देश के लिए उपयोगी साबित हों।
धर्मग्रंथों और उनके संदेशों के बारे में पढ़ें:
- कुरान के बारे में जानकारी: https://www.britannica.com/topic/Quran
- भगवद गीता का परिचय: https://www.britannica.com/topic/Bhagavad-Gita
- बाइबल के बारे में जानकारी: https://www.britannica.com/topic/Bible
कार्यक्रम के आयोजन में उर्दू विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका
इस इफ्तार कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय के उर्दू विभाग की प्रमुख डॉ. आलिया कौसर पठान ने विशेष प्रयास किए।
कार्यक्रम का संचालन तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन लियाकत अली खान ने किया।
इस कार्यक्रम ने यह साबित किया कि सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता के बावजूद भारत की असली ताकत आपसी सम्मान, सहिष्णुता और एकता में निहित है।

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