जमीयत उलेमा जालना की सभा में ईरान पर अमेरिकी-इज़राइली हमलों की निंदा, मुस्लिम समाज से एकता बनाए रखने की अपील
जालना | प्रतिनिधि
जमीयत उलेमा अरशद मदनी, जिला जालना की ओर से गुरुवार को जालना स्थित बागबान मस्जिद में एक विशेष सभा आयोजित की गई। ज़ुहर की नमाज़ के बाद आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, उलेमा और नागरिकों ने भाग लिया। सभा में वक्ताओं ने ईरान पर अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए कथित सैन्य हमलों की कड़ी निंदा करते हुए मुस्लिम समाज से एकता बनाए रखने की अपील की।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव और संघर्ष के कारण क्षेत्र की शांति और स्थिरता प्रभावित हो रही है। सभा में उपस्थित लोगों ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते राजनीतिक तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए आपसी भाईचारे और एकता का संदेश दिया।
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अमेरिका-इज़राइल गठबंधन पर जताई चिंता
सभा की अध्यक्षता करते हुए जमीयत उलेमा जालना के अध्यक्ष मौलाना सैयद सोहेल नदवी ने कहा कि अमेरिका-इज़राइल गठबंधन दुनिया में आक्रामक नीतियों और अन्याय का प्रतीक बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस गठबंधन की नीतियों के कारण पश्चिम एशिया में लंबे समय से अस्थिरता बनी हुई है।
मौलाना नदवी ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली हुसैनी खामेनेई पर हुए कथित सैन्य हमले और टारगेटेड किलिंग की निंदा करते हुए कहा कि इस दुखद परिस्थिति में जालना की मुस्लिम बिरादरी ईरान की जनता और दुनिया भर के शिया समुदाय के साथ अपनी संवेदना और एकजुटता व्यक्त करती है।
उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन के मुद्दे को लेकर लंबे समय से पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और हाल की घटनाओं ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है।
इस्लामी दुनिया से एकता की अपील
मौलाना नदवी ने अपने संबोधन में कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष को कुछ शक्तियां बेबुनियाद आरोपों के आधार पर सही ठहराने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में इस्लामी देशों और मुस्लिम समाज को अपने मतभेद भुलाकर आपसी एकता और भाईचारे को मजबूत करना चाहिए।
सभा में उपस्थित वरिष्ठ सामाजिक नेता इक़बाल पाशा ने भी पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के नागरिकों को अपने राजनीतिक भविष्य का निर्णय स्वयं करने का अधिकार है और किसी बाहरी शक्ति को किसी देश की सरकार या नेतृत्व तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया
जमात-ए-इस्लामी महाराष्ट्र के सचिव शेख मुजीब ने अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमले की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाई पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
उन्होंने ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व की शहादत पर दुख व्यक्त करते हुए दोनों पक्षों से अपील की कि तनाव को बढ़ाने के बजाय संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से समाधान तलाशा जाना चाहिए।
मुस्लिम समाज में एकता पर जोर
इस अवसर पर वहदत-ए-इस्लामी के स्थानीय अध्यक्ष लियाकत अली खान यासिर ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में मुस्लिम समाज को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैश्विक हालात को देखते हुए मुस्लिम देशों और समुदायों के बीच एकता और सहयोग बेहद आवश्यक है।
जमीयत उलेमा महमूद मदनी के सचिव मौलाना अहमद मिफ्ताही ने कहा कि शिया और सुन्नी समुदाय के बीच विचारधारात्मक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इस्लाम और मुस्लिम एकता के मुद्दे पर सभी को एकजुट रहना चाहिए।
वहीं मौलाना फिरोज अली ने सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाए जा रहे शिया-सुन्नी विवादों और अफवाहों की निंदा करते हुए कहा कि मौजूदा समय में मुस्लिम समाज को मजबूत और संगठित समुदाय के रूप में सामने आना चाहिए।
बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी
सभा को हाजी मुहम्मद एहतेशाम उद्दीन बागबान और अली मियां फाउंडेशन जालना के अध्यक्ष मौलाना अब्दुल रऊफ नदवी ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विचारधारात्मक मतभेदों के बावजूद इस्लामी भाईचारे के आधार पर एकता बनाए रखना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का समापन मौलाना अब्दुल रऊफ नदवी की दुआ के साथ हुआ। अंत में जमीयत उलेमा अरशद मदनी, जिला जालना के महासचिव मुहम्मद अयूब खान ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।
इस सभा में शहर के कई उलेमा, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में एमआईएम जिला जालना के अध्यक्ष शेख मजीद और वाजिद खान सहित कई प्रमुख व्यक्तियों ने भी भाग लिया।

