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अल्पसंख्यक दिवस की अनदेखी: “क्या प्रशासन इस महत्वपूर्ण दिन को खत्म करने की तैयारी में है?”

Minority Day ignored: “Is the administration preparing to abolish this important day?”

जालना: 18 दिसंबर को पूरे देश में अल्पसंख्यक दिवस मनाया जाता है, लेकिन जालना में इस दिन की महत्ता धूमिल होती जा रही है. समाजसेवी तय्यब बापु देशमुख ने आरोप लगाया कि 2014 से जिला सामान्य प्रशासन विभाग इस दिन को केवल औपचारिकता तक सीमित कर रहा है. प्रमुख अल्पसंख्यक नेताओं और पदाधिकारियों को आमंत्रित न करना और भव्य आयोजनों की कमी ने समाज में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है. 

*प्रशासन पर गंभीर सवाल*

तैय्यब बापु देशमुख ने कहा, “2014 से प्रशासन अल्पसंख्यक दिवस को जानबूझकर नजरअंदाज कर रहा है. भव्य आयोजनों की कमी और उदासीनता से यह दिन अपनी पहचान खोता जा रहा है. यह अल्पसंख्यांक समाज के अधिकारों और योगदान के प्रति प्रशासन की असंवेदनशीलता को दर्शाता है” 

*सम्मान और ठोस पहल की मांग

समाज के प्रमुख नेताओं ने मांग की है कि इस दिन को भव्य रूप से मनाया जाए. समाजसेवियों, पत्रकारों, डॉक्टरों और सरकारी अधिकारियों का सम्मान किया जाए. साथ ही, आयोजन को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए एक समर्पित समिति का गठन किया जाए. 

*समाज में बढ़ता असंतोष

प्रशासन की अनदेखी ने समाज में गहरी चिंता और असंतोष पैदा कर दिया है. तय्यब बापु देशमुख ने इस लापरवाही को अल्पसंख्यक समुदाय के साथ मजाक करार देते हुए तत्काल सुधार की मांग की. 

“अल्पसंख्यक दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि समाज के अधिकारों और योगदान का सम्मान है. इसे नज़रअंदाज़ करना हमारे समाज की गरिमा के खिलाफ है.प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए.” – तय्यब बापु देशमुख


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Imran Siddiqui

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