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कुंडलिका और सीना नदी के अतिक्रमण पर कार्रवाई की मांग, सामाजिक संगठनों का मौन आंदोलन

Silent movement of social organizations demanding action on encroachment of Kundalika and Seena rivers


जालना शहर की कुंडलिका और सीना नदी के अतिक्रमण को हटाने की मांग को लेकर आज, 23 दिसंबर, सोमवार दोपहर 1 बजे सामाजिक संगठनों ने जिला अधिकारी और नगर निगम कार्यालय के सामने मौन आंदोलन किया। आंदोलनकारी हाथों में “कुंडलिका-सीना नदी बचाओ” के पोस्टर लेकर खड़े हुए और प्रशासन से इस ऐतिहासिक नदी के संरक्षण की अपील की।

बेकायदा निर्माण की गंभीर समस्या:

शहर के गोल्डन जुबली स्कूल के पास स्थित खडेश्वर महादेव मंदिर की दीवार से सटी सीना नदी के पात्र में 1 किलोमीटर लंबा और 12 मीटर चौड़ा अवैध मार्ग बना दिया गया है। यह मार्ग मुरूम और पत्थरों से पक्का किया गया है, जिसके चलते नदी का पात्र काफी छोटा हो गया है।

इस मुद्दे पर कई बार नगर निगम को ज्ञापन देकर अतिक्रमण हटाने की मांग की गई। हालांकि, अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह भी उल्लेख किया कि कुंडलिका नदी एक ऐतिहासिक स्थल है, जहां भगवान श्रीराम ने अपने पिता राजा दशरथ का श्राद्ध किया था। ऐसे में इस नदी का संरक्षण और संवर्धन करना जरूरी है।

सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों की भागीदारी:

कुंडलिका-सीना रिज्युनिवेशन फाउंडेशन, समस्त महाजन ट्रस्ट, और अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के सदस्य पिछले 15 दिनों से इस मुद्दे पर विभिन्न चौकों में प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रमुख प्रदर्शनकारियों में समस्त महाजन ट्रस्ट की नूतन देसाई, उद्यमी रमेशभाई पटेल, सुनील रायठा, प्रा. सुरेश लाहोटी, उदय शिंदे, और रवी भक्कड शामिल थे।

प्रशासन का आश्वासन:

महानगरपालिका प्रशासक संतोष खांडेकर ने आश्वासन दिया कि नदी के रेडलाइन और ब्लूलाइन क्षेत्र की सीमा तय कर, इन क्षेत्रों में सभी अतिक्रमण जल्द ही हटाए जाएंगे।

सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से अपील की है कि ऐतिहासिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण इस नदी को अतिक्रमण मुक्त किया जाए और इसके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।


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Imran Siddiqui

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