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मराठा आरक्षण आंदोलन: मनोज जरांगे ने सातवां अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया, सरकार से शीघ्र निर्णय की मांग

Maratha reservation movement: Manoj Jarange started the seventh indefinite hunger strike, demanding quick decision from the government

जालना: मराठा आरक्षण की मांग को लेकर प्रमुख कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने शनिवार को जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में अपना सातवां अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है. यह अनशन मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की उनकी पुरानी और लगातार जारी मांगों को तेज करने के लिए किया गया है. 

जरांगे लंबे समय से मराठा समुदाय के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत नौकरी और शिक्षा में आरक्षण की मांग कर रहे हैं. उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वह ‘सगे सोयरे’ मसौदा अधिसूचना को तुरंत लागू करे. इस अधिसूचना के तहत मराठा समुदाय के सभी रक्त संबंधियों को कुणबी के रूप में मान्यता देने का प्रावधान है, जो कि एक कृषि प्रधान समुदाय है और ओबीसी श्रेणी के तहत विभिन्न सरकारी लाभों के पात्र हैं.

जरांगे ने कहा कि राज्य सरकार ने मराठा समुदाय को उनके अधिकार देने का वादा किया था, लेकिन अब तक ठोस कदम नहीं उठाया गया है. उन्होंने सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए इस अनशन को शुरू किया है और साफ कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं. 

*संतोष देशमुख हत्याकांड को लेकर सख्त कार्रवाई की मांग 

मनोज जरांगे ने न केवल मराठा आरक्षण बल्कि हाल ही में बीड जिले के मसाजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख की निर्मम हत्या के मामले में दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है. 9 दिसंबर को देशमुख का अपहरण कर उनकी बर्बर तरीके से हत्या कर दी गई थी, जिससे पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है. जरांगे ने दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग करते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कठोर कदम उठाए जाने चाहिए.

*सरकार से आग्रह: चुनावी वादों को पूरा करें 

अनशन स्थल पर मीडिया से बातचीत के दौरान मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मराठा समुदाय की मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की अपील की. उन्होंने कहा कि मराठा समाज ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में महायुति गठबंधन का समर्थन किया था और अब सरकार को अपने वादों को पूरा करना चाहिए. 

जरांगे ने जोर देकर कहा कि सरकार को उन मराठा समुदाय के सदस्यों को तुरंत कुणबी प्रमाणपत्र जारी करना चाहिए, जिनके पास आवश्यक दस्तावेज पहले से मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी से समुदाय में रोष बढ़ रहा है और इसका नकारात्मक प्रभाव राज्य की राजनीति पर पड़ सकता है. 

*मराठा समुदाय का समर्थन बढ़ता जा रहा है 

जरांगे के अनशन को देखते हुए राज्यभर से मराठा समुदाय के लोग जालना जिले में इकट्ठा हो रहे हैं. विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय नेताओं ने उनके समर्थन में आवाज उठाई है. उनका कहना है कि मराठा समुदाय के प्रति सरकार को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए और उनकी मांगों को गंभीरता से लेना चाहिए. 

राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि उच्च स्तरीय बैठकें हो रही हैं और जल्द ही इस पर कोई निर्णय लिया जा सकता है. 

*मराठा समुदाय की प्रमुख मांगें:

  • 1. ओबीसी श्रेणी में मराठा समुदाय को आरक्षण देना.
  • 2. ‘सगे सोयरे’ रक्त संबंधी नीति को लागू करके मराठा समुदाय के रक्त संबंधियों को कुणबी प्रमाणपत्र जारी करना. 
  • 3. संतोष देशमुख हत्या मामले में त्वरित न्याय और दोषियों को फांसी की सजा. 
  • 4. राज्य सरकार द्वारा मराठा समुदाय के विकास के लिए विशेष पैकेज की घोषणा. 

*जरांगे की चेतावनी 

मनोज जरांगे ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो मराठा समुदाय बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करेगा. उन्होंने कहा कि यह अनशन केवल एक शुरुआत है और यदि सरकार ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया, तो पूरे राज्य में व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. 

जरांगे के इस आंदोलन पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं. अब देखना यह होगा कि महाराष्ट्र सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और किस तरह मराठा समुदाय की मांगों को पूरा किया जाता है.


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Imran Siddiqui

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