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लाउडस्पीकर विवाद पर मोइनुद्दीन अशरफी का बड़ा बयान – कानून का सख्ती से पालन करें! 

Moinuddin Ashrafi’s big statement on loudspeaker controversy – Follow the law strictly!

*वक्फ संशोधन विधेयक मुसलमानों पर जबरन थोपने का आरोप 

जालना: बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर जारी निर्देशों का मुस्लिम समाज को पूरी सख्ती से पालन करना चाहिए. यह आदेश केवल मस्जिदों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी धर्मों के उपासना स्थलों पर लागू होता है. इस्लाम में भी यह निर्देश दिया गया है कि किसी को तकलीफ न पहुंचे, इसलिए जरूरी है कि लाउडस्पीकर की आवाज नियमों के अनुसार ही रखी जाए.
यह बयान ऑल इंडिया सुन्नी जमीयत-उल-उलेमा के अध्यक्ष और मुंबई निवासी सैयद मोइनुद्दीन अशरफी ने दिया.

वे ताजदार-ए-बगदाद कॉन्फ्रेंस में भाग लेने के लिए जालना पहुंचे थे. इस दौरान रजा अकादमी, जालना द्वारा आयोजित एक बैठक में वे लाउडस्पीकर विवाद और वक्फ संशोधन विधेयक  पर मुस्लिम समाज का मार्गदर्शन कर रहे थे.
बैठक में रजा अकादमी मराठवाड़ा अध्यक्ष सैय्यद जमील मौलाना सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे.

*मस्जिदों में लाउडस्पीकर को लेकर ‘प्रतिस्पर्धा’ गलत – अशरफी

मोइनुद्दीन अशरफी ने कहा कि कुछ मस्जिद ट्रस्टियों के बीच  लाउडस्पीकर की आवाज को लेकर अनावश्यक प्रतिस्पर्धा ** देखी जा रही है. अज़ान का मूल उद्देश्य यह है कि मस्जिद के आसपास रहने वाले लोग इसे सुनकर नमाज़ अदा करें, लेकिन कुछ स्थानों पर शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक आवाज पहुंचाने की होड़  मची हुई है, जिससे आम लोगों को परेशानी हो रही है. “इस्लाम एक ऐसा धर्म है, जिसमें सड़क से कंकड़, पत्थर, कांटा हटाना भी ईमान का हिस्सा माना गया है. ऐसे में जरूरी है कि मुस्लिम समाज लाउडस्पीकर की आवाज को नियंत्रित रखे ताकि किसी को असुविधा न हो.” 

*वक्फ संशोधन विधेयक – जबरन थोपने का आरोप!

वक्फ संशोधन विधेयक (वक्फ अमेंडमेंट बिल)  को लेकर मोइनुद्दीन अशरफी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि  संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी)  के समक्ष उन्होंने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थी.  तय एक घंटे की बैठक तीन घंटे तक चली, लेकिन फिर भी जेपीसी ने मुस्लिम समाज की बातों पर ध्यान नहीं दिया.

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “यह विधेयक मुसलमानों पर जबरन थोपा जा रहा है. यदि आवश्यकता पड़ी तो इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी.”

मोइनुद्दीन अशरफी ने कहा की वक्फ पूरी तरह मजहबी इदारा है.  वक्फ बोर्ड में ऐसे लोगों की नियुक्ति पर सवाल उठाए “जिन्हें इसकी बुनियादी समझ तक नहीं है.”उन्होंने कहा कि इस संशोधन से वक्फ संपत्तियों को नुकसान होगा, और वक्फ की जमीनों पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई में देरी होगी.

उन्होंने बताया कि ऑल इंडिया सुन्नी जमीयत-उल-उलेमा ने नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू से इस विधेयक के खिलाफ समर्थन मांगा था, लेकिन इन दोनों ने भी  इस पर चर्चा करने से इनकार कर दिया.

*वक्फ संपत्तियों को लेकर ‘झूठी’ जानकारी फैलाई जा रही!

बैठक में रजा अकादमी मराठवाड़ा अध्यक्ष सैय्यद जमील मौलाना ने भी इस मुद्दे पर बात रखते हुए कहा कि देश में यह गलत जानकारी फैलाई जा रही है कि रेलवे के बाद  सबसे ज्यादा जमीन वक्फ के पास है.उन्होंने इस दावे को खारिज करते हुए कहा, “जब तक आधिकारिक सर्वेक्षण नहीं होता, तब तक इस तरह की भ्रामक सूचनाओं को बढ़ावा नहीं देना चाहिए.”

उनके अनुसार, यदि इंटरनेट को खंगाल कर जानकारी हासिल की जाए तो यही पता चलेगा की देश में सबसे अधिक भूमि मंदिरों के पास है, उसके बाद रेलवे, फिर सेना और उसके बाद वक्फ संपत्तियों का स्थान आता है.

बैठक  मुफ्ती गुलाम नबी, मुनव्वर खान लाला ,  हाफिज अमजद रजा, हाफिज सैयद उमर, मौलाना नौशाद अलीमी, मौलाना अरमान अलीमी, मौलाना तौफीक अलीमी, मौलाना मसीहुद्दीन अलीमी, मौलाना रज्जाक, मौलाना अंसार, हाफिज मुनव्वर, हाफिज सरताज, हाफिज रेहान, गुलाम महबूब, असद रजवी, अतीक रजवी, मो अजीम, एड अरशद बागवान, डॉ यासीन, डॉ शाहनवाज, अय्यूब खान सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे. विभिन्न संगठनों द्वारा मोइनुद्दीन अशरफी का जोरदार स्वागत किया गया.


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Imran Siddiqui

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