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डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के अपमान मामले में कांग्रेस पार्टी की ओर से शुक्रवार को मार्च  

March on Friday by Congress Party in the matter of insult to Dr. Babasaheb Ambedkar

*जिला अध्यक्ष राजाभाऊ देशमुख द्वारा दी गई जानकारी  

जालना : भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का अपमान और लोकसभा सत्र में भारतीय संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर चर्चा को बाधित करने का प्रयास भाजपा द्वारा किया गया. यह घटना न्याय, समानता और आत्मसम्मान के आदर्शों का अपमान है. इस पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को अपने पद से इस्तीफा देकर भारत की जनता से माफी मांगनी चाहिए. इस मांग को लेकर जिला और शहर कांग्रेस की ओर से 27 दिसंबर, शुक्रवार को जालना में मार्च निकाला जाएगा. इसकी जानकारी जालना जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजाभाऊ देशमुख ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी.  

सोमवार को स्थानीय होटल अंबर में आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक कैलाश गोरंट्याल, जिला उपाध्यक्ष राजेंद्र राख, जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष नंदाताई पवार, अविनाश चव्हाण, अण्णासाहेब खंदारे, सोपान सपकाल, अब्दुल रफीक, शेख शमशोद्दीन, शेख खलील सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे.  

इस मौके पर राजाभाऊ देशमुख ने कहा कि भारतीय संविधान की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने लोकसभा अध्यक्ष को संविधान पर चर्चा के लिए पत्र लिखा था. यह प्रस्ताव स्वीकार कर संसद में चर्चा शुरू हुई. लेकिन, जो चर्चा संविधान पर होनी चाहिए थी, वह भाजपा के राजनीतिक स्वार्थ और अपमानजनक प्रदर्शन में बदल गई.  

भाजपा ने इस मंच का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं की बदनामी की. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संविधान के मूल सिद्धांत और उसके शिल्पकार डॉ. आंबेडकर का अपमान किया. “आंबेडकर, आंबेडकर” कहना एक फैशन बन गया है. अगर भगवान का नाम इतनी बार लिया जाता तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता, ऐसा बयान देकर उन्होंने केवल डॉ. आंबेडकर का नहीं बल्कि भारत की आत्मा का अपमान किया है.  

भाजपा ने जाति जनगणना का विरोध कर अपने दलित-विरोधी और आरक्षण-विरोधी रुख को उजागर किया. इससे संविधान के समानता और न्याय के सिद्धांतों को आघात पहुंचा है.  

देशमुख ने कहा कि संविधान के अपमान और डॉ. आंबेडकर की विरासत को कलंकित करने के इस प्रयास के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना आवश्यक है. भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र की नींव है. यह विशेष रूप से शोषित और उपेक्षित समुदायों के अधिकारों की गारंटी देता है.  

27 दिसंबर, शुक्रवार को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा से जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय तक मार्च निकाला जाएगा. उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भारत की जनता से तुरंत माफी मांगने और गृह मंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग की.


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Imran Siddiqui

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