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“कब तक मुफ्त चीजें बांटते रहेंगे?” सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकारा

कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

“How long will you keep distributing free things?” Supreme Court reprimanded the central government

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (9 दिसंबर) को एक सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को सख्त शब्दों में फटकार लगाई। कोर्ट ने केंद्र द्वारा दी जा रही मुफ्त सुविधाओं और रियायतों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर कब तक मुफ्त चीजें दी जाएंगी? कोर्ट ने कहा कि कोविड महामारी के बाद मुफ्त राशन पाने वाले प्रवासी मजदूरों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है।

जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत 81 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन प्रदान किया जा रहा है।

“अब केवल करदाता ही बचे हैं”

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर हैरानी जताई और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर ऐश्वर्या भाटी से पूछा, “इसका मतलब अब सिर्फ करदाता ही बचे हैं।”

यह याचिका एक स्वयंसेवी संस्था द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने अदालत से कहा कि उन प्रवासी मजदूरों को मुफ्त राशन दिया जाना चाहिए, जिनका ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण है। इस पर अदालत ने पूछा, “मुफ्त चीजें कब तक दी जानी चाहिएं? क्या हमें इन प्रवासी मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और उनके कौशल को विकसित करने की दिशा में काम नहीं करना चाहिए?”

केंद्र को मुफ्त राशन देने का निर्देश

प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे प्रवासी मजदूरों को राशन कार्ड मुहैया कराएं, ताकि वे केंद्र सरकार की मुफ्त राशन योजना का लाभ उठा सकें। जिनके पास राशन कार्ड नहीं हैं, लेकिन ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत हैं, उन्हें भी राशन दिया जाना चाहिए।

“केंद्र और राज्यों के बीच मतभेद न बढ़ाएं”

इस पर जस्टिस सूर्य कांत ने कहा, “समस्या यह है कि जब हम राज्यों को निर्देश देते हैं कि प्रवासी मजदूरों को राशन दिया जाए, तो वे मजदूर कहीं नजर नहीं आते। वे भाग जाते हैं। राज्यों को पता है कि यह केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है, इसलिए वे केवल राशन कार्ड बांटते हैं।”

अदालत ने यह भी कहा, “हमें केंद्र और राज्यों के बीच मतभेद पैदा नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा हुआ तो स्थिति और गंभीर हो जाएगी।”

कोर्ट का सवाल: रोजगार पर ध्यान क्यों नहीं?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुफ्त राशन देना अस्थायी समाधान हो सकता है, लेकिन रोजगार और कौशल विकास के प्रयास अधिक महत्वपूर्ण हैं। कोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र और राज्यों को समन्वय से काम करने की आवश्यकता बताई।

यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की उस चिंता को दर्शाती है, जिसमें मुफ्त योजनाओं पर निर्भरता को कम करने और देश के आर्थिक और सामाजिक ढांचे को मजबूत करने की बात कही गई है।


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Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a journalist based in Jalna, Maharashtra, and district representative for Navbharat (previously with Lokmat Samachar). He edits NewsNation Online, covering Jalna, Marathwada, Maharashtra and India, and ImranJalna, covering Islamic knowledge and Muslim-world news in English, Hindi and Urdu.

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