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प्रो. आदित्य मोजेस बने IIM दुबई के पहले डायरेक्टर — जालना के लाल ने रचा इतिहास | www.newsnationonline.com

जालना के होनहार ने रचा इतिहास — प्रो. आदित्य मोजेस बने IIM दुबई के पहले डायरेक्टर, भारतीय शिक्षा का परचम वैश्विक मंच पर फहराया

स्थान: जालना | प्रकाशन तिथि: 21 अप्रैल 2025 |

कभी-कभी एक निर्णय न केवल आपके करियर की दिशा बदलता है, बल्कि समाज के लिए एक नई प्रेरणा बन जाता है। जालना के मिशन हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. क्रिस्टोफर मोजेस और डॉ. शोभा मोजेस के सुपुत्र प्रो. आदित्य क्रिस्टोफर मोजेस ने ऐसा ही एक इतिहास रच दिया है। IIM अहमदाबाद के प्रोफेसर रह चुके आदित्य अब IIM दुबई ग्लोबल कैंपस के पहले डायरेक्टर नियुक्त किए गए हैं। यह जालना ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व की बात है।

‘डॉक्टर का बेटा डॉक्टर नहीं बनेगा’ — जब जालना चौंक उठा

जब आदित्य ने दसवीं के बाद बायोलॉजी छोड़ने का निर्णय लिया, तो हर ओर चर्चा होने लगी। मराठवाड़ा के प्रसिद्ध डॉक्टर दंपत्ति का बेटा आखिर डॉक्टर क्यों नहीं बनना चाहता? लेकिन आदित्य ने उसी समय दृढ़ता से कहा: “अगर मुझे मेडिकल नहीं करना है, तो बायोलॉजी से दूरी अभी से रखना बेहतर होगा।” यही आत्मविश्वास उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव बन गया।

IIM तक का सफर — मेहनत, दृष्टि और लगन का संगम

आदित्य ने मुंबई के फादर एंजल कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। फिर इंग्लैंड से एमएस (HRM) की डिग्री हासिल की। पुणे में कॉर्पोरेट नौकरी के बाद उन्होंने CAT की परीक्षा उत्तीर्ण कर IIM बंगलोर में दाखिला लिया। केवल 3.5 वर्षों में PhD पूरी कर लेना अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

IIM प्रोफेसर से इंटरनेशनल लीडर तक

IIM अहमदाबाद में प्रोफेसर के तौर पर आदित्य ने L&T, Ashok Leyland, Aster जैसी कंपनियों के लिए मैनेजमेंट प्रोग्राम्स डिजाइन किए। छात्रों ने लगातार उन्हें 9.5/10 से ऊपर की रेटिंग दी — यह दर्शाता है कि वे न केवल एक बेहतर शिक्षक हैं, बल्कि एक मजबूत प्रेरक भी हैं।

दुबई में भारतीय शिक्षा का नया अध्याय

दुबई सरकार ने जब IIM के साथ पूर्णकालिक ग्लोबल कैंपस शुरू करने का प्रस्ताव रखा, तो IIM निदेशक ने आदित्य को इस अभियान का नेतृत्व सौंपा। अब वे IIM दुबई के पहले डायरेक्टर बनकर भारतीय शिक्षा का प्रतिनिधित्व वैश्विक मंच पर करेंगे।

दादी से मिली प्रेरणा — जो अब आकार ले चुकी है

डॉ. मोजेस बताते हैं कि आदित्य बचपन में अक्सर कहते थे: “मुझे मेरी दादी की तरह शिक्षक बनना है।” आज वही सपना उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय शिक्षण संस्था का नेतृत्वकर्ता बना चुका है।

निष्कर्ष:
आदित्य मोजेस की उपलब्धि केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय प्रेरणा है। यह सफलता उन सभी युवाओं के लिए संदेश है कि यदि दृढ़ निश्चय, मार्गदर्शन और मेहनत हो — तो कोई भी सपना हकीकत बन सकता है।

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Imran Siddiqui

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