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“कब का टूट चुका था मैं…” — कैलाश गोरंट्याल की शायरी से गरमाई राजनीति, भाजपा में संभावित एंट्री से कांग्रेस-शिंदे गुट में हड़कंप

कैलाश गोरंट्याल की भाजपा में संभावित एंट्री से गरमाई जालना की राजनीति

“कब का टूट चुका था मैं, बस बिखरना है मुझे…”

कैलाश गोरंट्याल की शायरी से गरमाई जालना की सियासत

“कब का टूट चुका था मैं, बस बिखरना है मुझे…
तुम्हारे हजारों साल से मेरी ख़ामोशी सही,
न जाने कितने राज़ों को पर्दा रखती है…”

कांग्रेस नेता कैलाश गोरंट्याल द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई यह शायरी अब महज एक भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक संभावित राजनीतिक बदलाव की ओर इशारा मानी जा रही है। उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलों ने जालना जिले की राजनीति को हिला कर रख दिया है।

भाजपा में एंट्री से कांग्रेस और शिंदे गुट में हड़कंप

सूत्रों के अनुसार गोरंट्याल ने हाल ही में भोकरदन में भाजपा नेता रावसाहेब दानवे से गुप्त बैठक की है और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, अशोक चव्हाण, अतुल सावे, नारायण कुचे जैसे नेताओं से भी संपर्क में हैं।

उनके एक बयान “बहुत जल्द एक राजनीतिक बम फोड़ूंगा” ने तो सियासी माहौल पूरी तरह गरमा दिया है।

शिंदे गुट को लग सकता है बड़ा झटका

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर गोरंट्याल भाजपा में शामिल होते हैं तो शिवसेना शिंदे गुट के लिए यह एक बड़ा संकट बन सकता है। रावसाहेब दानवे और विधायक अर्जुन खोतकर के बीच पुराना तनाव पहले से ही गठबंधन में दरार का संकेत देता है।

कांग्रेस में अकेले दम पर खड़े नेता

गोरंट्याल को जालना में कांग्रेस का चेहरा माना जाता रहा है। पिछली विधानसभा चुनाव में उन्हें पार्टी की गुटबाजी और अब्दुल हफीज के बागी तेवर की वजह से हार का सामना करना पड़ा था।

महानगरपालिका चुनाव से पहले सियासी हलचल

अगर गोरंट्याल भाजपा में शामिल होते हैं, तो यह भाजपा के लिए महानगरपालिका चुनाव में बड़ी बढ़त बन सकती है। शहरी मतदाता का झुकाव भाजपा की ओर हो सकता है और शिंदे गुट को मुस्लिम मतदाताओं को साधने में चुनौतियां आ सकती हैं।

मुस्लिम वोट बैंक बना निर्णायक

गोरंट्याल को लंबे समय से मुस्लिम समाज का समर्थन मिलता रहा है। यदि वे भाजपा में भी शामिल होते हैं, तब भी उनका यह समर्थन बना रह सकता है। उधर अजीत पवार गुट के रशिद पहलवान और शेख मेहमूद भी इस वोट बैंक को लुभाने की कोशिश में हैं।

निष्कर्ष

कैलाश गोरंट्याल की भाजपा में संभावित एंट्री ने जालना की राजनीतिक ज़मीन को हिला दिया है। जहां भाजपा इसे स्थानीय नेतृत्व सशक्त करने का अवसर मान रही है, वहीं शिंदे गुट को अब अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए नई रणनीति बनानी पड़ेगी।

अब सबकी निगाहें गोरंट्याल के अगले कदम पर टिकी हैं — क्या यह वाकई बिखरने की शुरुआत है या एक नई पारी का आगाज़?

© 2025 | राजनैतिक विश्लेषण | जालना समाचार नेटवर्क

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