दुर्घटना मुआवज़े के ब्याज पर TDS समाप्त, पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने केंद्रीय बजट के फैसले का किया स्वागत
जालना | प्रतिनिधि
केंद्रीय बजट में वाहन दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिजनों को बड़ी राहत देने वाला अहम निर्णय लिया गया है। अब मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा स्वीकृत मुआवज़े की राशि पर मिलने वाले ब्याज पर TDS (स्रोत पर कर कटौती) नहीं की जाएगी। इस उपभोक्ता हितैषी फैसले का अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की जालना शाखा ने स्वागत किया है। संगठन का कहना है कि इससे पीड़ित परिवारों को पूरा ब्याज बिना कटौती मिलेगा और उनका आर्थिक संबल मजबूत होगा।
जालना में बैठक, फैसले को सर्वसम्मति से समर्थन
बजट के बाद आयोजित अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की जालना जिला कार्यकारिणी की बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में जिला अध्यक्ष डॉ. रमेश तारगे, उपाध्यक्ष डॉ. देवराव चौरे और एडवोकेट वसीम रफीक शेख, सचिव एडवोकेट महेश धन्नावत, सहसचिव सुरेंद्र पोतदार, कोषाध्यक्ष एडवोकेट महेश गोविंदराव भाले सहित देवगिरी प्रांत के अध्यक्ष डॉ. विलास मोरे और प्रांत सचिव ओंकार जोशी उपस्थित रहे।
बैठक में सचिव एडवोकेट धन्नावत ने इस निर्णय के समर्थन में प्रस्ताव रखा, जिसे सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी।
पहले क्या थी व्यवस्था
पूर्व नियमों के अनुसार, यदि दुर्घटना मुआवज़े पर मिलने वाला ब्याज किसी वित्तीय वर्ष में ₹50,000 से अधिक होता था, तो आयकर अधिनियम की धारा 194A के तहत उस पर TDS काटी जाती थी।
एडवोकेट डी. पी. पाटील ने बताया कि दुर्घटना से जुड़े दावे अक्सर कई वर्षों तक न्यायालय में लंबित रहते हैं, जिससे ब्याज की राशि काफी बढ़ जाती है। TDS कटौती के कारण पीड़ितों को वास्तविक रूप से मिलने वाली राशि कम हो जाती थी। अब यह शर्त हटने से पीड़ित या उनके वारिसों को पूरा ब्याज बिना किसी कटौती प्राप्त होगा।
प्रशासनिक जटिलताएं भी होंगी कम
इस निर्णय से पीड़ित परिवारों के साथ-साथ बीमा कंपनियों और बैंकों को भी राहत मिलेगी। TDS कटौती के कारण दावों के निपटारे में अनावश्यक देरी होती थी और आम नागरिकों को कर वापसी के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। विशेषज्ञों का मानना है कि अब प्रक्रिया सरल होने से दावों का निपटारा तेज़ी से हो सकेगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि दुर्घटना मुआवज़ा और उस पर मिलने वाला ब्याज आय नहीं, बल्कि नुकसान की भरपाई है; इसलिए उस पर कर लगाना उचित नहीं था।
आंकड़ों के बीच संवेदनशील निर्णय
देश में सड़क दुर्घटनाओं की गंभीर स्थिति को देखते हुए यह फैसला अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2025 के पहले छह महीनों में ही महामार्गों पर लगभग 26,770 लोगों की मृत्यु हुई। ऐसे में यह निर्णय पीड़ित परिवारों के लिए मानवीय और संवेदनशील राहत के रूप में देखा जा रहा है।
उपभोक्ता हित में बड़ा कदम
बैठक के अंत में देवगिरी प्रांत के अध्यक्ष डॉ. विलास मोरे ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय उपभोक्ता हित में है और दुर्घटना पीड़ित परिवारों के दर्द पर मरहम लगाने जैसा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार आगे भी आम नागरिकों के हित में ऐसे फैसले लेती रहेगी।
Key Points (मुख्य बिंदु)
- दुर्घटना मुआवज़े के ब्याज पर TDS समाप्त
- MACT से स्वीकृत मुआवज़े पर मिलेगा पूरा ब्याज
- पीड़ित परिवारों को आर्थिक राहत
- बीमा कंपनियों और बैंकों की प्रशासनिक जटिलताएं कम
- दावों के निपटारे की प्रक्रिया होगी तेज़
- अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने फैसले का समर्थन किया
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. अब किस पर TDS नहीं लगेगा?
👉 MACT द्वारा स्वीकृत दुर्घटना मुआवज़े की राशि पर मिलने वाले ब्याज पर अब TDS नहीं लगेगा।
Q2. पहले TDS कब काटा जाता था?
👉 यदि ब्याज राशि एक वित्तीय वर्ष में ₹50,000 से अधिक होती थी, तो धारा 194A के तहत TDS काटी जाती थी।
Q3. इस फैसले से किसे फायदा होगा?
👉 दुर्घटना पीड़ितों, उनके परिजनों, बीमा कंपनियों और बैंकों—सभी को।
Q4. सरकार ने TDS क्यों हटाया?
👉 क्योंकि दुर्घटना मुआवज़ा और उसका ब्याज आय नहीं, बल्कि नुकसान की भरपाई है।
Q5. क्या इससे दावों के निपटारे में तेजी आएगी?
👉 हां, प्रक्रिया सरल होने से दावों के निपटारे में तेजी आएगी।
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