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वक्फ संशोधन विधेयक: जेपीसी ने एनडीए के 14 संशोधनों को दी मंजूरी, विपक्ष ने बताया ‘दिखावटी प्रक्रिया’

Wakf Amendment Bill: JPC approves 14 amendments of NDA, opposition calls it a ‘sham process’

नई दिल्ली: वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधनों को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने अपनी अंतिम बैठक में मंजूरी दे दी, जबकि विपक्ष द्वारा प्रस्तुत संशोधनों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों ने बैठक की प्रक्रिया को ‘तानाशाहीपूर्ण’ करार दिया और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।

विधेयक की पृष्ठभूमि और प्रमुख प्रावधान

वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 का उद्देश्य 1995 में लागू वक्फ अधिनियम में संशोधन करना है। विधेयक का मुख्य उद्देश्य राज्य वक्फ बोर्डों की शक्तियों में परिवर्तन लाना, वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण सुनिश्चित करना और अवैध अतिक्रमणों को हटाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।

प्रस्तावित संशोधनों में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं:

1. वक्फ उपयोग प्रावधान (यूजर क्लॉज) का उन्मूलन:
संशोधन के तहत ‘वक्फ बाय यूजर’ क्लॉज को समाप्त किया गया है, जिससे धार्मिक उद्देश्यों के लिए उपयोग की जा रही वक्फ संपत्तियों को लेकर विवादों को कम किया जा सके।

2. भूमि विवाद समाधान का सरलीकरण:
विधेयक के नए प्रावधानों के अनुसार, वक्फ संपत्तियों से संबंधित विवादों का निपटारा अब राज्य सरकार द्वारा नियुक्त आयुक्त द्वारा किया जाएगा, जो पहले कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र में आता था।

3. वक्फ बोर्डों की संरचना में बदलाव:
संशोधित विधेयक में वक्फ बोर्ड के सदस्यों की संख्या में वृद्धि की गई है, जिसमें इस्लामी विद्वानों की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

4. अतिक्रमण हटाने के कड़े प्रावधान:
विधेयक के तहत राज्य सरकारों को वक्फ संपत्तियों पर हुए अवैध अतिक्रमणों को तत्काल प्रभाव से हटाने की शक्ति प्रदान की गई है।

5. पारदर्शिता और जवाबदेही:
प्रस्तावित संशोधनों के तहत संपत्तियों की निगरानी को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करने की योजना है।

जेपीसी बैठक की कार्यवाही और विपक्ष की आपत्ति

संशोधन विधेयक पर चर्चा करने के लिए आयोजित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की अंतिम बैठक में कुल 44 संशोधनों पर विचार किया गया। बैठक के दौरान एनडीए के सभी 14 प्रस्तावित संशोधनों को बहुमत के आधार पर स्वीकार कर लिया गया, जबकि विपक्ष द्वारा प्रस्तावित संशोधनों को अस्वीकार कर दिया गया।

जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने बैठक के बाद बयान देते हुए कहा,
“हमने छह महीनों में सभी सुझावों पर विस्तार से विचार किया। यह हमारी अंतिम बैठक थी, और बहुमत के आधार पर 14 संशोधनों को स्वीकार किया गया है। विपक्षी दलों के संशोधनों पर भी विचार किया गया, लेकिन मतदान में उनके पक्ष में 10 और विरोध में 16 वोट पड़े।”

वहीं विपक्ष ने इस पूरी प्रक्रिया को लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लंघन बताया। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद कल्याण बनर्जी ने बैठक की कार्यवाही पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा,

“यह पूरी प्रक्रिया केवल दिखावे के लिए की गई थी। हमें उचित रूप से अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला। जेपीसी अध्यक्ष ने तानाशाही तरीके से संशोधनों को मंजूरी दी और हमें कोई स्पष्टीकरण देने का अवसर नहीं दिया।”

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी ने भी आरोप लगाया कि,

“यह देश के अल्पसंख्यकों और वक्फ बोर्ड के साथ एक मजाक है। संविधान की अनदेखी कर विधेयक को पास किया गया है। यह वक्फ संपत्तियों को हड़पने की प्रक्रिया का हिस्सा है।”

जेपीसी अध्यक्ष की प्रतिक्रिया

जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और लोकतांत्रिक तरीके से चलाई गई। उन्होंने कहा,
“यह विधेयक देश के वक्फ संपत्तियों के कुशल प्रबंधन और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। विपक्ष के सभी सुझावों पर विचार किया गया और बहुमत से निर्णय लिया गया।”

विधेयक को लेकर भविष्य की संभावनाएं

जेपीसी ने इस विधेयक पर अपनी रिपोर्ट बजट सत्र में पेश करने की योजना बनाई है। गौरतलब है कि शीतकालीन सत्र के दौरान समिति के कार्यकाल को बढ़ाया गया था ताकि सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार किया जा सके। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि संसद में इस विधेयक को कितना समर्थन मिलता है और विपक्ष इसे रोकने के लिए किस हद तक जाता है।

सरकार का दावा है कि इस विधेयक से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी, लेकिन विपक्ष का मानना है कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर कुठाराघात है।

निष्कर्ष

वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को लेकर संसद में बड़ा राजनीतिक संघर्ष देखने को मिल सकता है। जहां सरकार इसे मुस्लिम समाज के लिए हितकारी और पारदर्शी मानती है, वहीं विपक्ष इसे एकपक्षीय और लोकतंत्र विरोधी कदम करार दे रहा है। आने वाले सत्रों में इस पर गहन चर्चा और संभावित विरोध देखने को मिल सकता है।

इस विधेयक को लेकर विभिन्न हितधारकों की राय बंटी हुई है, और इसका प्रभाव न केवल मुस्लिम समाज बल्कि पूरे देश की धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन पर पड़ सकता है। अब देखने वाली बात होगी कि संसद में इस विधेयक का क्या भविष्य होता है और यह किस रूप में लागू किया जाता है।


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Imran Siddiqui

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