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संभल और बहराइच की हिंसा पर चिंतन – एम आई शेख

ऐतिहासिक मस्जिदों का अवैध सर्वेक्षण
19 नवंबर 2024 को उत्तर प्रदेश के संभल जिले के दीवानी न्यायालय में जामा मस्जिद से जुड़ी याचिका दायर की गई। इसमें दावा किया गया कि 526 ई. में इस मस्जिद को एक मंदिर तोड़कर बनाया गया था और इसलिए इसका सर्वेक्षण किया जाए। यह याचिका एडवोकेट हरिशंकर जैन ने दाखिल की, जो पहले काशी और मथुरा की मस्जिदों के मामलों में भी याचिकाएं दायर कर चुके हैं। याचिका दाखिल होते ही दो घंटे के भीतर न्यायालय ने सर्वेक्षण का आदेश दे दिया, और उसी दिन पहला सर्वेक्षण पूरा हुआ।


Reflection on the violence in Sambhal and Bahraich – M I Sheikh


24 नवंबर को एएसआई टीम और पुलिस की सुरक्षा में वकील हरिशंकर जैन और उनके समर्थक मस्जिद में जय श्रीराम के नारे लगाते हुए घुस गए। इससे मुस्लिम समुदाय के कुछ युवाओं का आक्रोश भड़क उठा और उन्होंने पथराव किया। पुलिस ने मौके पर गोलीबारी कर पांच मुस्लिम युवकों को मार दिया।



हिंसा के लिए बहाने और बुलडोजर संस्कृति
पिछले महीने बहराइच में एक मुसलमान के घर पर भगवा झंडा लगाने के प्रयास में एक व्यक्ति की मौत के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। मुस्लिम संपत्तियों को जलाने और पुलिस की कार्रवाई में कई लोग मारे गए। उत्तर प्रदेश में मामूली घटनाओं के बाद एफआईआर दर्ज कर गरीब और पिछड़े वर्ग के घरों पर बुलडोजर चलाना एक नई परंपरा बन गई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाने का आदेश दिया है।



संविधान और भारत की भावना पर खतरा
26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया गया, जो हमें आइडिया ऑफ इंडिया यानी भारत की भावना की याद दिलाता है। यह भावना विविधता में एकता के विचार पर आधारित है। संविधान के प्रस्तावना में उल्लिखित समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुता ही इस भावना के मूल स्तंभ हैं।



हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने प्रस्तावना से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटाने की याचिका खारिज कर दी, जो लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। परंतु, धार्मिक स्थलों के स्वरूप में बदलाव के प्रयास और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के नाम पर चल रही गतिविधियां आइडिया ऑफ इंडिया के लिए गंभीर खतरा हैं।



सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का खतरा
भारत जैसे बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक देश में “एक देश, एक संस्कृति” का नारा अप्रासंगिक है। देश की विविधता को गुलदस्ते की तरह संरक्षित करना ही हमारी एकता का आधार है। यूरोप में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के चलते वहां के देशों ने अपनी प्रगति खो दी थी। भारत को भी इसी दिशा में ले जाने का प्रयास उसे कमजोर करेगा।



आगे की राह
भारत में विश्व का नेतृत्व करने की क्षमता है, परंतु इसके लिए धर्म, भाषा, और प्रांतीय विवादों से ऊपर उठकर आइडिया ऑफ इंडिया को सशक्त करना होगा। यदि हम अपनी विविधता और समावेशी संस्कृति की रक्षा नहीं करेंगे, तो हमारा देश आपसी घृणा और विघटन का शिकार हो जाएगा।



निष्कर्ष
संकीर्ण राष्ट्रवाद से ऊपर उठकर, संविधान और आइडिया ऑफ इंडिया के मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता है। तभी भारत न केवल एक मजबूत राष्ट्र बन सकेगा, बल्कि विश्व का नेतृत्व करने में भी सक्षम होगा।

जय हिंद!


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Imran Siddiqui

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