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चांदी की थाली में शाही दावत, किसान-मजदूर के भूखे हालात! — कैलाश गोरंट्याल का सरकार पर तीखा हमला

चांदी की थाली में शाही दावत, किसान-मजदूर के भूखे हालात!

चांदी की थाली में शाही दावत, किसान-मजदूर के भूखे हालात! — कैलाश गोरंट्याल का सरकार पर तीखा हमला

जालना : जब महाराष्ट्र का किसान कर्ज तले दबकर आत्महत्या कर रहा है, श्रमिक दो वक्त की रोटी के लिए जूझ रहा है और बेरोजगार युवा सरकारी नौकरी के लिए भटक रहे हैं — तब राज्य सरकार विधायकों और सांसदों को 4500 रुपये की चांदी की थाली में शाही दावत परोस रही है।

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष और जालना के पूर्व विधायक कैलाश गोरंट्याल ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे आम जनता की पीड़ा पर “नमक छिड़कना” बताया है।

सरकार का आयोजन, जनता की उपेक्षा?

गोरंट्याल ने कहा कि मुंबई में अंदाज समिति की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें सरकार ने देशभर के सांसदों और विधायकों के लिए शाही स्वागत की व्यवस्था की।

“प्रत्येक व्यक्ति को 4500 रुपये की थाली में चांदी के बर्तनों में भोजन परोसा गया। क्या यह वही महाराष्ट्र है, जहाँ किसान रोज आत्महत्या कर रहे हैं?”

लाडली बहनों, SC-ST योजनाओं के लिए फंड नहीं?

उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब लाडली बहनों को ₹2100 प्रतिमाह देने की योजना के लिए सरकार के पास फंड नहीं है, अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण योजनाओं का बजट दूसरी जगह मोड़ा जा रहा है — तब यह शाही खर्च पूरी तरह “जनता की भावनाओं के साथ विश्वासघात” है।

जनता का पैसा, लेकिन मेहमानों के लिए?

पूर्व विधायक ने सवाल उठाया कि अगर आम जनता संकट में है, तो उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के लिए इतनी शाही मेहमाननवाज़ी का औचित्य क्या है?

“अगर सरकार ने फिजूलखर्ची बंद कर आमजन की प्राथमिकताओं पर ध्यान नहीं दिया, तो जनता आगामी चुनाव में इसका करारा जवाब देगी।”

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में जनता इस फिजूलखर्ची का हिसाब मांगने वाली है और उसे यह दिखावे की राजनीति अब रास नहीं आने वाली।


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