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महाराष्ट्र में ‘जिला व्यवसाय सुधार कार्ययोजना 2025’ — कारोबार को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम

जालना/प्रतिनिधि: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में व्यापारिक माहौल को और अधिक सुगम बनाने के लिए ‘डिस्ट्रिक्ट बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान 2025’ (DBRAP 2025) की औपचारिक शुरुआत की है। इस योजना के तहत कुल 154 सुधारात्मक बिंदु निर्धारित किए गए हैं, जिन्हें 15 अगस्त 2026 तक लागू किया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि यह पहल राज्य को “Ease of Doing Business” के क्षेत्र में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने का लक्षित कदम है। योजना में जिलाधिकारियों (कलेक्टरों) को अधिक प्रशासनिक एवं वैधानिक अधिकार दिए जा रहे हैं ताकि मंजूरियाँ और नीतिगत निर्णय स्थानीय स्तर पर तेज़ी से लिए जा सकें।

DBRAP 2025 के प्रमुख लक्ष्यों में भूमि एवं निर्माण अनुमति प्रक्रियाओं का सरलीकरण, श्रम नियमों से जुड़ी पारदर्शिता और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की बेहतर उपलब्धता शामिल हैं। इसके साथ ही डिजिटल एकल-खिड़की प्लेटफ़ॉर्म ‘MAITRI 2.0’ के जरिए अनुमोदन प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी तथा त्वरित बनाने का उद्देश्य रखा गया है।

सरकार ने उल्लेख किया कि पिछले सुधार चक्र में महाराष्ट्र ने 402 में से 399 सुधार बिंदुओं को सफलतापूर्वक पूरा किया था, और अब ज़िला-स्तर पर क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया जाएगा। प्रत्येक जिले में सुधारों की निगरानी के लिए विभागीय समितियाँ बनाई जाएँगी जो अपनी प्रगति रिपोर्ट 31 दिसंबर 2025 तक प्रस्तुत करेंगी।

जालना के उद्योगपति सतीश पंच ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “जिला स्तर पर अधिकारों का विकेंद्रीकरण उद्योग जगत के लिए बहुत लाभदायक रहेगा। अब छोटे और मध्यम उद्योगों को भी त्वरित निर्णय और अनुमति मिलने से कामकाज में गति आएगी। फडणवीस सरकार का यह कदम वास्तव में निवेशकों के विश्वास को और मजबूत करेगा।”

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि योजना को प्रभावी रूप से लागू किया गया तो यह न केवल निवेश आकर्षित करेगी, बल्कि सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों (MSME) के विकास, रोजगार सृजन और जिला-स्तरीय औद्योगिक विस्तार में मददगार सिद्ध होगी।

प्रमुख चुनौतियाँ और निगरानी

  • 154 सुधारात्मक बिंदुओं का निरंतर और समान रूप से पालन करवाना।
  • डिजिटल एकल-खिड़की के सुचारु कार्यान्वयन के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण।
  • निगरानी, जवाबदेही तथा जिलों में संसाधन संतुलन सुनिश्चित करना।

सरकार की इस पहल से जिले-स्तर पर निर्णय-क्षमता मजबूत होगी और यदि राज्य एवं स्थानीय प्रशासन समन्वित रूप से काम करें तो यह योजना महाराष्ट्र की आर्थिक प्रगति को नई गति दे सकती है।


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