NewsNation Online

FireFly In News

जालना मनपा भ्रष्टाचार पर सवाल: सिर्फ खांडेकर की गिरफ्तारी क्यों?

भ्रष्टाचार पर दोहरा मापदंड? मनपा में सिर्फ खांडेकर की गिरफ्तारी, बाकी जिम्मेदारों पर चुप्पी क्यों

राजस्व विभाग में सख्ती, नगर निगम में नरमी—एडवोकेट महेश धन्नावत ने उठाए गंभीर सवाल

जालना:
जिले में भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुए महेश धन्नावत ने कहा है कि एक ही जिले के दो सरकारी विभागों—राजस्व विभाग और जालना महानगरपालिका—में भ्रष्टाचार के मामलों पर कार्रवाई का पैमाना अलग-अलग क्यों है। जहां राजस्व विभाग के करोड़ों रुपये के अतिवृष्टि अनुदान घोटाले में कई आरोपियों के अग्रिम जमानत आवेदन खारिज किए गए, वहीं जालना महानगरपालिका के भ्रष्टाचार मामले में केवल आयुक्त संतोष खांडेकर की गिरफ्तारी तक ही कार्रवाई सीमित क्यों रही, यह गंभीर प्रश्न है।

एडवोकेट धन्नावत ने जारी बयान में कहा कि जालना जिले के राजस्व विभाग में किसानों के अनुदान में कथित हेराफेरी के मामले में कई तलाठियों और कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए। आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अदालत ने सरकार और किसानों के साथ धोखाधड़ी को गंभीर मानते हुए किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अदालत का यह सख्त रुख पूरी तरह उचित और स्वागतयोग्य है, लेकिन यही सख्ती नगर निगम के मामलों में क्यों नहीं दिखाई देती, यह समझ से परे है।


एक व्यक्ति दोषी, बाकी सभी निर्दोष?

जालना महानगरपालिका के आयुक्त संतोष खांडेकर को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद केवल उन्हीं की गिरफ्तारी हुई और इसके बाद मामले में आगे कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिखी। एडवोकेट धन्नावत ने सवाल उठाया कि नगर निगम में कोई भी निर्णय केवल एक व्यक्ति के हस्ताक्षर से पूरा नहीं होता। फाइलें कई स्तरों से गुजरती हैं और उन पर अनेक अधिकारियों व कर्मचारियों की संस्तुतियां और हस्ताक्षर होते हैं। ऐसे में केवल एक अधिकारी को दोषी ठहराना और बाकी सभी को क्लीन-चिट देना तर्कसंगत और विश्वसनीय नहीं लगता


चयनात्मक कार्रवाई ज्यादा चिंताजनक

धन्नावत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कई बार अपने फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार देश के लिए अत्यंत घातक है। इस पृष्ठभूमि में भ्रष्टाचार के मामलों में चयनात्मक कार्रवाई होना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि आम जनता के भरोसे को भी कमजोर करता है।

सुप्रीम कोर्ट से जुड़े संदर्भ के लिए:
👉 https://main.sci.gov.in


ईओडब्ल्यू से निष्पक्ष और गहन जांच की मांग

एडवोकेट धन्नावत ने मांग की कि जिस आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को राजस्व घोटाले की जांच सौंपी गई है, उसी एजेंसी को जालना महानगरपालिका के भ्रष्टाचार प्रकरण की जांच की जिम्मेदारी भी दी जाए। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान चार्टर्ड अकाउंटेंट और तकनीकी अभियंताओं जैसे बाहरी विशेषज्ञों की मदद ली जानी चाहिए।

उनके अनुसार नगर निगम द्वारा अब तक स्वीकृत सभी

  • बिलों,
  • ठरावों (प्रस्तावों), और
  • फाइलों

की गहन जांच होनी चाहिए, विशेष रूप से सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उनके लिए किए गए भुगतानों का वैज्ञानिक तरीके से मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है।

EOW से संबंधित जानकारी:
👉 https://mahapolice.gov.in


लोकप्रतिनिधियों से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील

हाल ही में हुए चुनावों के बाद नगर निगम में लोकनिर्वाचित प्रतिनिधियों ने कार्यभार संभाला है। एडवोकेट धन्नावत ने इन जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे इस पूरे मामले पर व्यक्तिगत ध्यान दें और प्रशासन के साथ मिलकर जांच को तार्किक और ठोस निष्कर्ष तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि शहर के विकास के लिए जारी किया गया सरकारी धन किसकी जेब में जा रहा है, यह पता लगाना जनप्रतिनिधियों का नैतिक और संवैधानिक दायित्व है।


मानवाधिकार आयोग के निर्देशों पर भी सवाल

धन्नावत ने अपनी पूर्व याचिका पर मानवाधिकार आयोग द्वारा दिए गए निर्देशों का भी उल्लेख किया। इनमें

  • शहर का डंपिंग ग्राउंड,
  • नाला सफाई व्यवस्था, और
  • नियमित जलापूर्ति

जैसे नागरिकों के मूल अधिकारों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इन निर्देशों का अब तक कितना पालन हुआ है, क्योंकि नागरिक सुविधाओं की अनदेखी भी प्रशासनिक भ्रष्टाचार का ही एक रूप है।

मानवाधिकार आयोग से संबंधित जानकारी:
👉 https://nhrc.nic.in


गहन जांच नहीं हुई तो भ्रष्टाचार का जाल बना रहेगा

अंत में एडवोकेट महेश धन्नावत ने कहा कि यदि राजस्व विभाग की तरह महानगरपालिका में भी गहन, निष्पक्ष और परिणामकारी जांच नहीं की गई, तो केवल एक-दो अधिकारियों पर कार्रवाई कर देने से भ्रष्टाचार की जड़ें कमजोर नहीं होंगी। इससे भ्रष्टाचार का विस्तृत और संगठित जाल यथावत बना रहेगा, जिसकी कीमत अंततः आम नागरिकों को चुकानी पड़ेगी।


जालना मनपा भ्रष्टाचार

An image questioning selective action on corruption with a focus on the arrest of Khandekar, featuring text about the Revenue Department's strictness and concerns regarding the Municipal Corporation. Advocate Mahesh Dhannawat is highlighted, raising critical questions about civic corruption in Jalna, Maharashtra.
Advocate Mahesh Dhannawat questions selective action on corruption in Jalna highlighting the arrest of Khandekar amidst larger systemic issues

Discover more from NewsNation Online

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

आपके लिए सुझाव

author avatar
NewsNationOnline Team

Discover more from NewsNation Online

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading