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जालना-खामगांव रेलवे मार्ग की मांग को लेकर तीन घंटे का बंद, मामा चौक पर धरना आंदोलन



जालना-खामगांव रेलवे मार्ग की मांग को लेकर तीन घंटे का बंद, मामा चौक पर धरना आंदोलन

जालना: जालना-खामगांव रेलवे मार्ग की मांग को लेकर रेलवे संघर्ष समिति द्वारा बुधवार (10 सितंबर) को पुकारे गए बंद को शहरवासियों और व्यापारियों का जबरदस्त समर्थन मिला। व्यापारी संगठनों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान तीन घंटे तक बंद रखे। बंद के कारण सामान्यत: चहल-पहल से भरे बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा और व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह ठप रही।

मामा चौक पर धरना आंदोलन

इस अवसर पर रेलवे संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुभाषचंद्र देविदान ने समिति के संस्थापक गणेशलाल चौधरी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर आंदोलन की शुरुआत की। धरने में कई वरिष्ठ नेता, व्यापारी महासंघ के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

धरना स्थल पर प्रदर्शनकारी
धरना आंदोलन में शामिल व्यापारी और कार्यकर्ता

धरने के दौरान आंदोलनकारियों ने “जालना-खामगांव रेलमार्ग जल्द शुरू करो”, “रेल्वे संघर्ष समिति का विजय हो” जैसे नारे लगाकर माहौल गूंजा दिया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति

महासचिव फिरोजअली ने जालना-खामगांव रेलमार्ग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और समिति द्वारा अब तक किए गए संघर्ष का ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि यह रेलमार्ग ब्रिटिश शासनकाल में स्वीकृत हुआ था और इसके लिए निजाम शासन में 200 हेक्टेयर भूमि भी सुरक्षित की गई थी। समिति का कहना है कि इस रेलमार्ग की शुरुआत से मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक विकास होगा।

धरना आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी
धरना में शामिल महिलाएं और नागरिक

साथ ही यदि बीड़-जालना रेलमार्ग भी चालू होता है तो उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने में यह परियोजना अहम भूमिका निभाएगी।

ज्ञापन और मांग

धरने के बाद समिति के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी आशिमा मित्तल से भेंट की और रेल मंत्री अश्विनकुमार वैष्णव को संबोधित ज्ञापन सौंपा। इसमें बताया गया कि पिछले 20 वर्षों से यह आंदोलन जारी है। अब तक रेलवे बोर्ड तीन बार सर्वेक्षण कर चुका है और पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रावसाहेब दानवे ने अंतिम सर्वेक्षण रिपोर्ट भी भेजी थी, लेकिन नीति आयोग ने आर्थिक मंजूरी लंबित रखी है।

राज्य सरकार ने 15 मार्च 2024 की कैबिनेट बैठक में इस रेलमार्ग के लिए 50 प्रतिशत आर्थिक हिस्सेदारी देने का निर्णय लिया है और केंद्र सरकार को इसकी जानकारी दी है। समिति ने चेतावनी दी कि यदि जल्द मंजूरी नहीं दी गई तो आंदोलन को और व्यापक व तीव्र स्वरूप दिया जाएगा।

नीति आयोग को दखल लेनी चाहिए: देविदान

समिति अध्यक्ष सुभाषचंद्र देविदान ने कहा कि नीति आयोग इस परियोजना में बाधा डाल रहा है। उन्होंने बंद की सफलता के लिए व्यापारियों और नागरिकों का आभार जताया और कहा कि जालना का व्यापार, उद्योग और परिवहन व्यवस्था के लिए यह रेलमार्ग मील का पत्थर साबित होगा। यदि जल्द मंजूरी नहीं दी गई तो समिति लोकतांत्रिक तरीके से और उग्र आंदोलन छेड़ेगी।

रेलवे संघर्ष समिति के नेता और कार्यकर्ता

Tags: जालना, खामगांव रेलवे मार्ग, रेलवे संघर्ष समिति, धरना आंदोलन, बंद

 


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