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₹20 लाख रिश्वत डील में ₹10 लाख लेते पकड़े गए जालना नगर निगम आयुक्त — एसीबी की कार्रवाई से हड़कंप

₹20 लाख की रिश्वत डील में ₹10 लाख की पहली किस्त लेते रंगेहाथ पकड़े गए जालना नगर निगम आयुक्त — एसीबी की बड़ी कार्रवाई से हिल गया पूरा प्रशासन

स्थान: जालना | दिनांक: 16 अक्टूबर 2025

समाचार ब्यूरो, जालना: सत्ता की ताकत और पैसों के लालच का खेल मंगलवार की शाम जालना में खत्म हो गया, जब नगर निगम आयुक्त संतोष महादेव खांडेकर (48 वर्ष) को भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (ACB) की टीम ने ₹20 लाख की रिश्वत डील में ₹10 लाख की पहली किस्त स्वीकार करते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई उनके सरकारी आवास कुंडलिका, मोतीबाग क्षेत्र, जालना में की गई।

शिकायत और ट्रैप कार्रवाई का पूरा मामला

मिली जानकारी के अनुसार, एक स्थानीय ठेकेदार ने नगर निगम के अंतर्गत किए गए विकास कार्यों के भुगतान को मंजूरी दिलाने के लिए आयुक्त द्वारा ₹20 लाख की रिश्वत मांगने की शिकायत दर्ज कराई थी। ठेकेदार ने रिश्वत देने से इनकार करते हुए 15 अक्टूबर 2025 को एसीबी कार्यालय, जालना में लिखित शिकायत दी थी।

शिकायत की पुष्टि के बाद 16 अक्टूबर की शाम एसीबी ने सावधानीपूर्वक ट्रैप ऑपरेशन (सापळा कार्रवाई) की योजना बनाई। जैसे ही आयुक्त खांडेकर ने ₹10 लाख नकद की पहली किस्त स्वीकार की, टीम ने मौके पर पहुंचकर उन्हें रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से रिश्वत की रकम और एक सैमसंग मोबाइल फोन बरामद किया गया।

कई करोड़ के ठेके से जुड़ा रिश्वत मामला

सूत्रों के मुताबिक, रिश्वत की यह मांग नगर निगम के कई करोड़ रुपये के ठेका कार्यों से जुड़ी थी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं —

  • वाल्मिक नगर (गांधीनगर) पुल से रिंग रोड तक सीमेंट रोड और डीपी रोड का निर्माण,
  • भक्कड फार्म से भवानी नगर तक सड़क व भूमिगत नाली का निर्माण,
  • नगर निगम भवन की तीसरी मंज़िल का निर्माण,
  • एपीएमसी रिंग रोड से हिंदनगर तक 24 मीटर चौड़ी डीपी रोड का सीमेंट कंक्रीटकरण।

बताया गया है कि वाल्मिक नगर परियोजना की कुल निविदा राशि ₹2.90 करोड़ (जीएसटी छोड़कर) है। कार्य पूरा होने के बाद ₹1.92 करोड़ का भुगतान ठेकेदार को किया जा चुका था, जबकि ₹90 लाख की राशि अभी बकाया थी। इसी भुगतान को मंजूरी देने के लिए ही आयुक्त ने ₹20 लाख की रिश्वत मांगी थी।

एसीबी की टीम और कार्रवाई का नेतृत्व

यह कार्रवाई एसीबी छत्रपति संभाजीनगर के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई। टीम का नेतृत्व डीएसपी बी.एस. जाधवर ने किया, जबकि उनके साथ सहायक अधिकारी शरदचंद्र रोडगे, निरीक्षक कोमल शिंदे और अन्य पुलिसकर्मी मौजूद थे। पूरी कार्रवाई का संचालन पुलिस अधीक्षक माधुरी केदार कांगणे और अपर पुलिस अधीक्षक शशिकांत सिंगारे के निर्देशानुसार किया गया।

शहर में हड़कंप, जनता में संतोष

गिरफ्तारी के बाद जालना नगर निगम में भारी हड़कंप मच गया। कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच सन्नाटा पसर गया, जबकि शहर में एसीबी की इस कार्रवाई की खुलेआम सराहना हो रही है। नागरिकों ने कहा कि यह घटना ईमानदार ठेकेदारों के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है और प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर एक करारा प्रहार साबित हुई है।

भ्रष्टाचार की शिकायत कहाँ करें?

भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी किसी सरकारी कार्य के लिए रिश्वत की मांग करता है, तो बिना डर के इसकी सूचना दें।

संपर्क विवरण:

निष्कर्ष

यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि ईमानदारी की जीत और भ्रष्टाचार पर कानून की सख्त चेतावनी है। जिस ₹20 लाख की डील ने सत्ता के गलियारों में सौदा तय किया था, उसी डील की पहली ₹10 लाख की किस्त ने एक भ्रष्ट अफसर का चेहरा बेनकाब कर दिया।

जालना की इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि अगर जनता जागरूक और साहसी बने, तो भ्रष्टाचार चाहे जितना बड़ा क्यों न हो, गिरना तय है।


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