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संविधान ने महिलाओं को दिया समान अधिकार और विकास का मार्ग : एडवोकेट श्रीराम हुसे

जालना — प्रतिनिधि | 22 सितंबर 2025

शारदीय नवरात्र के अवसर पर आयोजित नौ दिवसीय कानूनी शिविर के उद्घाटन सत्र में एडवोकेट श्रीराम हुसे ने कहा कि भारतीय संविधान ने महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और समान वेतन जैसे अधिकार देकर उनके सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त किया है। आयोजन अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (देवगिरी प्रांत, जालना शाखा) तथा इनरव्हील क्लब ऑफ जालना होरायज़न के संयुक्त प्रयास से और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से डॉ. सुभाष ढाकणे विधि महाविद्यालय में शुरू हुआ।

Legal camp launch event with advocates and participants, discussing women's rights and empowerment.

उद्घाटन और मुख्य बातें

सोमवार, 22 सितंबर को हुए उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता एडवोकेट श्रीराम हुसे ने संविधान के विभिन्न प्रावधानों का हवाला देते हुए बताया कि कैसे संविधान ने महिलाओं को पारंपरिक घर-परिवार की सीमाओं से निकालकर समान अवसर प्राप्त करने के मार्ग खोले। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षा, नौकरी, सुरक्षा, न्याय और समान वेतन को महिलाओं के अधिकारों के मुख्य स्तंभ बताया।

एड हुसे ने संवैधानिक धाराओं का संदर्भ देते हुए कहा कि अनुच्छेद 21(ए) के तहत राज्य पर 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का दायित्व है, जबकि अनुच्छेद 39(ए)39(डी) समान अवसर और पर्याप्त साधन उपलब्ध कराने पर बल देते हैं। इन प्रावधानों ने सामाजिक संरचना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में मदद की है।

“शिक्षा और समान अवसर ही सामाजिक समावेशन और महिला सशक्तिकरण की नींव हैं — संविधान ने यही रास्ता दिखाया है।” — एडवोकेट श्रीराम हुसे

Group photo of organizers and speakers at the inauguration of a nine-day legal camp for women in Jalna, featuring prominently displayed event banner and participants in formal attire.

प्रमुख उपस्थित जन

उद्घाटन के दौरान इनरव्हील क्लब की अध्यक्षा हेमा जैस्वाल, परिषद के सचिव एड. प्रदीप पटेल, एड. महेश धन्नावत, एड. अश्विनी धन्नावत, प्रा. शरद कावंकर, प्राचार्या क्रांतीलक्ष्मी मुदीराज, उपप्राचार्या धनश्री मांटे सहित अनेक प्राध्यापक, अधिवक्ता और विद्यार्थी उपस्थित थे।

एडवोकेट महेश धन्नावत का संदेश

एड. महेश धन्नावत ने अपने संबोधन में बताया कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में महिलाओं को राजनीति, नेतृत्व और निर्णय निर्माण में समान अवसर मिल रहे हैं, जिसका सकारात्मक प्रभाव समाज के समग्र विकास पर पड़ रहा है।

शिविर की रूपरेखा

आयोजकों के अनुसार आगामी नौ दिनों के दौरान शिविर में महिलाओं के अधिकारों, पारिवारिक कानून, लैंगिक समानता, रोजगार कानून, घरेलू हिंसा निवारण और विधिक सहायता से जुड़े विशेषज्ञ व्याख्यान तथा प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किए जाएंगे। शिविर का उद्देश्य महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देना व उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

शिविर शिड्यूल (संक्षेप)

  • दिन 1–3: महिला अधिकार व परिवारिक कानून (विशेषज्ञ व्याख्यान)
  • दिन 4–6: रोजगार कानून, मजदूरी व समान वेतन संबंधी जानकारी
  • दिन 7–8: घरेलू हिंसा, महिला सुरक्षा और राहत तंत्र
  • दिन 9: समापन सत्र — समेकन, प्रमाण-पत्र वितरण व भविष्य की कार्ययोजना

आयोजकों ने बताया कि शिविर में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को आवश्यक अध्ययन सामग्री और प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। साथ ही स्थानीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा मोहताज महिलाओं के लिए मुफ्त परामर्श भी उपलब्ध कराया जाएगा।

उद्घाटन सत्र में उपस्थित लोग, जिसमें एडवोकेट श्रीराम हुसे भाषण दे रहे हैं और अन्य वक्ता एवं दर्शक सुन रहे हैं।

Event Snapshot

Event 9-day Legal Camp for Women Organisers Akhil Bharatiya Adhivakta Parishad (Devgiri Prant, Jalna) & InnerWheel Club Jalna Horizon Support District Legal Services Authority Venue Dr. Subhash Dhakne Law College, Jalna Key Speaker Adv. Shriram Huse Contact District Legal Services Authority, Jalna (for participation & queries)

रिपोर्ट: जालना प्रतिनिधि

आयोजक: अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (देवगिरी प्रांत, जालना शाखा) और इनरव्हील क्लब ऑफ जालना होरायज़न | सहयोग: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण


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