मोती तालाब में गौतम बुद्ध की पूर्णाकृति प्रतिमा स्थापना में छह वर्षों से जारी विलंब; स्मारक संस्था ने 10 दिन की अंतिम चेतावनी दी, अन्नत्याग आंदोलन की तैयारी
जालना। शहर के मोती तालाब (संभाजी उद्यान) परिसर में तथागत भगवान गौतम बुद्ध की पूर्णाकृति प्रतिमा स्थापित करने की योजना पिछले छह वर्षों से अधर में लटकी हुई है। आवश्यक कागजी कार्यवाही पूर्ण होने के बावजूद नगर प्रशासन द्वारा पेडस्टल निर्माण शुरू न किए जाने पर बौद्ध समाज और स्मारक समिति में गहरा असंतोष है। अब संस्था ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 10 दिनों के भीतर कार्य शुरू नहीं किया गया, तो जिलाधिकारी कार्यालय के सामने अन्नत्याग आंदोलन शुरू किया जाएगा।
तथागत गौतम बुद्ध स्मारक संस्था के अनुसार, प्रतिमा स्थापना के लिए स्मारक समिति तथा महानगरपालिका द्वारा संयुक्त रूप से परियोजना को मंज़ूरी दी गई थी। संस्था ने बताया कि सभी आवश्यक दस्तावेज समय पर नगर पालिका प्रशासन को सौंप दिए गए थे। इसके अलावा, तत्कालीन नगरपालिका ने प्रतिमा निर्माण के लिए औरंगाबाद के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार सुनिल देवरे को लगभग ₹10 लाख की राशि छह वर्ष पहले प्रदान भी कर दी थी।
हालाँकि, प्रतिमा स्थापित करने के लिए जिस पेडस्टल (ओटा/आधार मंच) का निर्माण किया जाना आवश्यक था, वह काम अब तक शुरू नहीं किया गया है। संस्था का आरोप है कि नगर पालिका की कार्यप्रणाली में जानबूझकर विलंब किया जा रहा है, जिससे प्रतिमा स्थापना का संपूर्ण प्रकल्प वर्षों से लंबित है।
स्मारक संस्था ने कहा कि वे इस विषय पर बार-बार लिखित रूप से और व्यक्तिगत रूप से नगरपालिका से संपर्क कर चुके हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। संस्था के सदस्यों का कहना है कि महानगरपालिका की “द्वि-मानक नीति” और उदासीन रवैये से जालना शहर के बौद्ध समाज सहित अन्य समुदायों में भी गहरी नाराज़गी है।
संस्था द्वारा महानगरपालिका आयुक्त को सौंपे गए अंतिम निवेदन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि—
यदि 10 दिनों के भीतर प्रतिमा स्थापना या पेडस्टल निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया,
तो समिति के सदस्य जिलाधिकारी कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन अन्नत्याग उपोषण शुरू करेंगे।
निवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि आंदोलन के कारण उत्पन्न होने वाली स्थितियों की सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
इस निवेदन पर दिनकर घेवंन्दे, धर्मा खिल्लारे, रमेश देहेडकर, अशोक पडूळ और गणेश लुटे के हस्ताक्षर मौजूद हैं, जिन्होंने प्रशासन से शीघ्रातिशीघ्र कार्यवाही की मांग की है।
मोती तालाब परिसर में प्रतिमा स्थापना को लेकर शहर के नागरिकों में भी व्यापक चर्चा है, और अब प्रशासन के सामने तय 10 दिनों की समयसीमा एक महत्वपूर्ण कसौटी साबित होगी।


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