कुपोषणमुक्त जालना के लिए सभी विभाग मिलकर करें काम, समन्वय ही सफलता की कुंजी: जिलाधिकारी आशिमा मित्त
जालना, 30 जनवरी (जिमाका):
जिले में कुपोषण की समस्या को पूरी तरह समाप्त करने के लिए सभी संबंधित विभागों और संस्थाओं को आपसी समन्वय के साथ जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करना होगा। महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायत राज, एकीकृत बाल विकास सेवा योजना (आईसीडीएस) और स्वयंसेवी संस्थाओं को एकजुट होकर प्रयास करने की आवश्यकता है। यह स्पष्ट संदेश जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने दिया।
वे ‘जालना मिशन न्यूट्रिशन’ कार्यक्रम के अंतर्गत जिला प्रशासन द्वारा आयोजित विशेष प्रशिक्षण सत्र को संबोधित कर रही थीं। यह प्रशिक्षण 30 जनवरी 2026 को जिलाधिकारी कार्यालय में स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आयोजित किया गया था।
कुपोषण सामाजिक समस्या, सभी की भूमिका जरूरी
जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि कुपोषण केवल किसी एक विभाग तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक चुनौती है। इसे समाप्त करने के लिए प्रत्येक विभाग को अपनी भूमिका पहचानते हुए सक्रिय रूप से काम करना होगा। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को समय पर पौष्टिक आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और सही परामर्श मिलना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही अभिभावकों में पोषण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने आंगनवाड़ी सेविकाओं को निर्देश दिए कि वे बच्चों का नियमित वजन मापन करें, वृद्धि पंजी (ग्रोथ चार्ट) को अद्यतन रखें, पोषण संबंधी सही जानकारी दें और घर-घर जाकर प्रभावी ढंग से सेवाएं प्रदान करें। जिलाधिकारी ने कहा कि “कुपोषणमुक्त जालना” का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है जब सभी विभाग एकजुट होकर काम करें।
‘जालना मिशन न्यूट्रिशन’ के तहत व्यापक पहल
जालना जिले में कुपोषण, मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा हेल्थ स्पोकन ट्यूटोरियल और विल्स ग्लोबल फाउंडेशन के सहयोग से ‘जालना मिशन न्यूट्रिशन’ कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को संतुलित और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना, साथ ही उनके शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास को सुनिश्चित करना है।
104 विषयों पर विशेषज्ञों के एनीमेटेड वीडियो
इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुपोषण, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी और पोषण से जुड़े कुल 104 विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए एनीमेटेड वीडियो शामिल किए गए हैं। इन वीडियो के माध्यम से गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किस प्रकार का आहार लेना चाहिए, शिशु को वैज्ञानिक तरीके से स्तनपान कैसे कराना चाहिए, 0 से 5 वर्ष के बच्चों के लिए कौन-सा पूरक और पौष्टिक आहार उपयुक्त है, जैसे महत्वपूर्ण विषयों को सरल भाषा में समझाया गया है।
1000 कर्मचारियों का चयन, गांव-गांव पहुंचेगा अभियान
कार्यक्रम के पहले चरण में स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी इन वीडियो का गहन अध्ययन करेंगे। इसके बाद 100 अंकों की लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिसके आधार पर 1000 कर्मचारियों का चयन प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा।
चयनित 1000 कर्मचारी अपने-अपने गांवों में 10-10 माता-बाल जोड़ों को गोद लेकर उन्हें नियमित परामर्श देंगे और उनके पोषण स्तर एवं स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए कार्य करेंगे। कार्यक्रम के अंतिम चरण में इन 1000 कर्मचारियों में से 250 मास्टर ट्रेनर्स का चयन जिला स्तर पर किया जाएगा। ये मास्टर ट्रेनर्स आगे जिले की अन्य माताओं को प्रशिक्षण के अनुसार मार्गदर्शन और परामर्श प्रदान करेंगे। कुपोषणमुक्त जालना मिशन.
नागरिकों से सहयोग की अपील
जिलाधिकारी ने जिले के नागरिकों से अपील की कि वे ‘जालना मिशन न्यूट्रिशन’ का पूरा लाभ उठाएं और बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास में सक्रिय सहयोग करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयास से ही कुपोषण पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
अधिकारियों और विशेषज्ञों की उपस्थिति
इस प्रशिक्षण सत्र में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी. एम. मिन्नू, जिला शल्य चिकित्सक डॉ. राजेंद्र पाटील, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जयश्री भुसारे, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी कोमल कोरे, सहायक जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गजानन म्हस्के, निवासी चिकित्सा अधिकारी डॉ. शीतल सोनी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
कार्यशाला के दौरान राज्य परियोजना प्रमुख संदीप रंजना ने पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इस अवसर पर ग्रामीण अस्पतालों के चिकित्सा अधिकारी, तालुका स्वास्थ्य अधिकारी, आईसीडीएस परियोजना अधिकारी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के अधिकारी और आंगनवाड़ी पर्यवेक्षक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कुपोषणमुक्त जालना मिशन.

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