बाल मजदूरी के खिलाफ जालना में सख्त कार्रवाई के आदेश, तत्काल छापेमारी अभियान चलाने के निर्देश
उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को मिलेगा ‘बालस्नेही पुलिस पुरस्कार’ — जिलाधिकारी आशिमा मित्तल
जालना | जिमाका
जिले में बाल एवं किशोर श्रम के उन्मूलन को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। आशिमा मित्तल ने बाल मजदूरी जैसी सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ तत्काल और प्रभावी छापेमारी (रेड) अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को श्रम से मुक्त कर शिक्षा की मुख्यधारा में लाना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी कार्यालय के सभागृह में दूरदृश्य प्रणाली के माध्यम से आयोजित जालना जिला कॉपीमुक्त अभियान एवं बाल श्रमिक खोज मोहीम से संबंधित समीक्षा बैठक में वे बोल रही थीं। बैठक में निवासी उपजिलाधिकारी शशिकांत हदगल, पुलिस उपअधीक्षक रविंद्र निकाळजे, शिक्षा अधिकारी बालू खरात, जिला बाल संरक्षण अधिकारी गजानन इंगळे सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
राष्ट्रीय अभियान के तहत जालना में विशेष कार्रवाई
जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहल पर 26 जनवरी से 31 मार्च 2026 तक पूरे देश में बाल श्रमिकों के बचाव और पुनर्वसन का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत जालना जिले में बाल एवं किशोर श्रमिकों, साथ ही सड़क पर रहने वाले बच्चों की पहचान कर उनकी मुक्ति और पुनर्वसन किया जाएगा। इसके लिए जिले के हॉटस्पॉट चिन्हित कर योजनाबद्ध छापेमारी की जाएगी।
हर थाने को रोजाना कार्रवाई के निर्देश
बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि बाल श्रम (प्रतिबंध एवं उन्मूलन) अधिनियम, 1986 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को खतरनाक उद्योगों और प्रक्रियाओं में काम पर रखना दंडनीय अपराध है।
- जिले के सभी थाना प्रभारी अपने-अपने क्षेत्र में न्यूनतम पांच बाल श्रमिकों की पहचान कर उनकी मुक्ति और पुनर्वसन सुनिश्चित करें।
- खतरनाक उद्योगों में कार्यरत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मुक्ति के लिए विशेष रेड अभियान चलाए जाएं।
यदि जांच में यह पाया जाता है कि किसी मालिक ने बाल श्रमिक के माता-पिता को किसी भी रूप में अग्रिम राशि दी है, तो उस बच्चे को बंधुआ मजदूर माना जाएगा और संबंधित मालिक के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे बच्चों को नियमों के अनुसार सभी सरकारी लाभ दिलाने के भी निर्देश दिए गए।
मालिकों पर आर्थिक दंड और आपराधिक मामला
बाल श्रमिकों को काम पर रखने वाले मालिकों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा। साथ ही प्रति बाल श्रमिक 20,000 रुपये जिला बाल कल्याण निधि में जमा कराए जाएंगे, जबकि 5,000 रुपये प्रति बाल श्रमिक शासन की ओर से इस निधि में जोड़े जाएंगे। इस राशि का उपयोग प्राथमिकता से उसी बाल श्रमिक के पुनर्वसन के लिए किया जाएगा।
इसके अलावा, जिला कृती दल की साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित करने और बाल मजदूरी के खिलाफ व्यापक जनजागृति अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए।
‘बालस्नेही पुलिस पुरस्कार’ की घोषणा
बाल श्रमिकों की मुक्ति और पुनर्वसन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को ‘बालस्नेही पुलिस पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि बाल मजदूरी से बच्चों को शारीरिक और मानसिक नुकसान होता है और शिक्षा के उम्र में श्रम करने से उनका भविष्य प्रभावित होता है।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि कहीं 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से काम कराया जाता दिखे, तो तुरंत श्रम विभाग या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दें।
जालना जिला कॉपीमुक्त अभियान: बोर्ड परीक्षाओं में कड़ी निगरानी
बैठक में आगामी बोर्ड परीक्षाओं को लेकर भी चर्चा की गई। जिले में उच्च माध्यमिक (12वीं) की परीक्षाएं 10 फरवरी से 18 मार्च 2026 और माध्यमिक (10वीं) की परीक्षाएं 20 फरवरी से 18 मार्च 2026 तक आयोजित होंगी।
- 12वीं के 37,338 विद्यार्थियों के लिए 79 परीक्षा केंद्र
- 10वीं के 32,433 विद्यार्थियों के लिए 102 परीक्षा केंद्र
सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी रहेगी। इसके साथ ही जिले के 12 संवेदनशील परीक्षा केंद्रों (12वीं के 8 और 10वीं के 4) पर ड्रोन कैमरों से निगरानी और रिकॉर्डिंग की जाएगी।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि परीक्षाएं भयमुक्त, पारदर्शी और नकलमुक्त वातावरण में संपन्न हों। इसके लिए संवेदनशील केंद्रों पर कड़ा पुलिस बंदोबस्त रखा जाए और परीक्षा अवधि के दौरान पुलिस विभाग द्वारा पूर्ण सहयोग सुनिश्चित किया जाए।
इस बैठक में जिले के सभी उपविभागीय पुलिस अधिकारी और थाना प्रभारी ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।
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