गणित और मराठी की बुनियादी शिक्षा का अनोखा उत्सव — जालना के जेईएफ व जैन विद्यालय द्वारा 15 दिवसीय ‘गंमत-जंमत’ शिबिर का आयोजन
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स्थान: जालना | विशेष संवाददाता | 12 मई 2025
विद्यार्थियों के लिए गर्मी की छुट्टियाँ जहाँ एक ओर विश्रांति, प्रवास और खेलों का समय होती हैं, वहीं जालना एज्युकेशन फाउंडेशन और जैन प्राथमिक विद्यालय ने इस अवसर को गणित और मराठी भाषा की बुनियादी समझ विकसित करने के लिए प्रयोग में लिया। 15 दिवसीय ‘गंमत-जंमत’ उन्हाळी शिबिर के माध्यम से 75 से अधिक शैक्षणिक खेलों और गतिविधियों के ज़रिए बच्चों में आधारभूत शिक्षण के बीज बोए गए, जिससे यह शिविर एक प्रकार से ‘फाउंडेशन लर्निंग’ का उत्सव बन गया।
चार सौ विद्यार्थियों की सहभागिता
दूसरी से चौथी कक्षा के कुल 400 विद्यार्थियों ने प्रतिदिन चार घंटे उपस्थिति देकर स्वप्रेरणा से इस शिबिर में भाग लिया। तेज धूप के बावजूद अभिभावक बच्चों को शाला पहुंचा रहे थे क्योंकि यहाँ पढ़ाई नहीं बल्कि खेलों के माध्यम से सीखने का उत्सव चल रहा था।
समापन समारोह — 12 मई 2025
सोमवार, 12 मई को इस शिविर का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। अध्यक्षता सुनील रायठठा (अध्यक्ष, जालना एज्युकेशन फाउंडेशन) ने की। मंच पर प्रा. सुरेश लाहोटी (संस्थापक अध्यक्ष), सुरेश कुलकर्णी (सचिव), प्रा. ओमप्रकाश झांजरी (विश्वस्त), सुदेश सकलेचा (अध्यक्ष, जैन श्रावक संघ), डॉ. धरमचंद गादिया (सचिव), भरतकुमार गादिया (उपाध्यक्ष), कचरूलाल कुंकूलोळ (सहसचिव), संजयकुमार बंब, विनोदकुमार मुथा (शालेय समिती अध्यक्ष), प्रवीणकुमार बोरा, जज श्रीमती राजश्री परदेशी, डॉ. दीपक बगडिया (रोटरी क्लब अध्यक्ष), उदय शिंदे (100 रुपये सोशल क्लब), और मुख्याध्यापिका श्रीमती गीता पोरवाल उपस्थित थे।
शिविर की मुख्य विशेषताएँ:
- गणित के 45 और मराठी के 25 शैक्षणिक खेल और क्रियाएँ
- चित्र देखकर कहानी बनाना, नाट्य अभिनय, शब्दकोड़ी, जोड़-घटाव, संख्या लेखन
- आकलन क्षमता, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति कौशल का विकास
- कलाकृति निर्माण, समूह में सहभागिता, संख्याज्ञान और खेलों के जरिए शिक्षण
उद्धरण और वक्तव्य:
सुनील रायठठा ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा, “खेलों के माध्यम से मूलभूत अवधारणाएँ सिखाने से
बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है। आत्मविश्वास हो तो जीवन में कुछ भी असंभव नहीं होता।
हर बच्चे में एक छिपी हुई शक्ति होती है, ज़रूरत है तो उसे पहचानने और दिशा देने की।”
डॉ. धरमचंद गादिया ने कहा, “छुट्टी के दिनों में 400 बच्चों की रोज़ाना उपस्थिति
उनके सीखने के प्रेम और पालकों के विश्वास का प्रतीक है।”
प्रा. सुरेश लाहोटी ने कहा, “शिक्षा में क्रांति केवल संस्था, शाला और शिक्षकों के सामूहिक
प्रयास से ही संभव है। जैन प्राथमिक विद्यालय द्वारा वर्षभर में प्राप्त की गई 100% पायाभूत साक्षरता
का यह शिविर एक सशक्त टप्पा है।”
मुख्याध्यापिका गीता पोरवाल ने कहा, “यह सिर्फ़ खेल नहीं थे, बल्कि बच्चों में
आत्मविश्वास जगाने वाले अनुभव थे।”
प्रदर्शनी और प्रस्तुति:
शिबिर के अंतिम दिन बच्चों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों और खेल प्रोजेक्ट्स की प्रदर्शनी आयोजित की गई। हर स्टॉल पर विद्यार्थियों ने आत्मविश्वासपूर्वक प्रस्तुति दी, जिसे देख पालकों और अतिथियों ने भरपूर सराहा। बच्चों ने प्रसंशा से भावुक होकर प्रतिक्रिया दी।
टीम और संचालन:
शिबिर में 15 सदस्यों की कोर टीम और 30 स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन मीरा मोहिते (पर्यवेक्षिका) ने किया और आभार प्रदर्शन प्रा. राहुल लाहोटी ने किया। शिक्षक, पालक और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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