हजरत सैय्यद पीर गैबशाह रहमतुल्लाह अलैह का उर्स शरीफ संपन्न — तीन दिवसीय आयोजन में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब, दरगाह शरीफ में गूंजे अमन और मोहब्बत के तराने

जालना: मंठा रोड स्थित पेट्रोल पंप के समीप पहाड़ी शरीफ दरगाह पर हजरत सैय्यद पीर गैबशाह रहमतुल्लाह अलैह का तीन दिवसीय सालाना उर्स शरीफ 15 से 17 अक्टूबर 2025 तक बड़ी अकीदत, शांति और रूहानी माहौल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। तीन दिनों तक दरगाह परिसर में अमन, भाईचारे और मोहब्बत का पैगाम गूंजता रहा।

यह रूहानी आयोजन सैय्यद अख्तर अली शाह हुसैन (दुर्वेश गिरोहे रसूल शाही साबिर, मुतवक्किल गोशा नशीन एवं गादी नशीन सायगांव, ता. अंबाजोगाई, जि. बीड) की सरपरस्ती में संपन्न हुआ। उर्स के दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने दरगाह शरीफ में हाजिरी लगाई, फातिहा पढ़ी और अमन-चैन की दुआ मांगी।

उपस्थिति एवं वरिष्ठ अतिथि

कार्यक्रम के दौरान दरगाह के मुतवल्ली नसरुल्लाह ख़ान लाला, शिवसेना नेता अभिमन्यु खोतकर, मुनव्वरख़ान लाला, आगा ख़ान, फिरोज ख़ान, वसीम ख़ान, फहीम ख़ान, नदीम ख़ान, शाहिद ख़ान, राजा ख़ान, सफ़र ख़ान सायगांव, शेख फहीम, शेख अली अहमद, कृष्णा मिटकर, अमन ख़ान, जावेद ख़ान, सुभान ख़ान, अयाज ख़ान, हिमायू खान और जुबेर ख़ान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

प्रमुख कार्यक्रम

  • 15 अक्टूबर: नमाज़-ए-मगरिब के बाद आयोजित मिलाद शरीफ से उर्स का आरंभ।
  • 16 अक्टूबर: नमाज-ए-जोहर के बाद कुरानखानी, फातेहा और लंगर-ए-आम; शाम को संदल शरीफ व चादर पेश करने की रस्म; रात में चिराग रोशन की परंपरा।
  • कव्वाली महफ़िल: उसी रात आयोजित कव्वाली महफ़िल का मुख्य आकर्षण रही — पुणे के कव्वाल हैदर नाज़ा और जलगांव के आसिफ हैरा की सूफियाना प्रस्तुतियाँ। “इश्क़-ए-खुदा” और “मोहब्बत-ए-रसूल” जैसे कलामों ने माहौल को रूहानी बना दिया।
  • 17 अक्टूबर: नमाज-ए-फज्र के बाद फातिहा और तबर्रुख तक्सीम के साथ उर्स का समापन।

धन्यवाद और संचालन

पूरे आयोजन की व्यवस्था ख़ादिम नसीरउल्लाह ख़ान (लालाभाई) के नेतृत्व में की गई। कार्यक्रम की सफलता पर मुनव्वर ख़ान लाला ने सभी श्रद्धालुओं और शहरवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “हजरत पीर गैबशाह रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह इंसानियत, मोहब्बत और भाईचारे का संदेश देती है। हर साल यहां अमन और एकता का पैगाम और मजबूत होता जा रहा है।”

समापन संदेश

तीन दिन चले इस उर्स शरीफ ने जालना में धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और सांप्रदायिक सौहार्द की नई मिसाल कायम की। दरगाह शरीफ की फिजा में गूंजता “अमन और मोहब्बत का पैगाम” श्रद्धालुओं के दिलों में हमेशा के लिए बस गया।

रिपोर्ट: NewsNationOnline — जालना