महात्मा फुले मार्केट पर सियासी घमासान: जालना नगर निगम की बैठक में भाजपा-शिवसेना आमने-सामने
जालना (संवाददाता):
जालना नगर निगम की सोमवार को आयोजित आम सभा में महात्मा फुले मार्केट के पुनर्निर्माण को लेकर जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिला। बैठक के दौरान भाजपा और शिवसेना के पार्षदों के बीच तीखी बहस हुई, जिससे कुछ समय के लिए सभागार का माहौल तनावपूर्ण और हंगामेदार बन गया।
🔴 15 साल पुराने मुद्दे पर फिर गरमाई राजनीति
बैठक में भाजपा पार्षद अक्षय गोरंट्याल ने सवाल उठाया कि करीब 15 वर्ष पहले हटाए गए महात्मा फुले मार्केट के पुनर्निर्माण के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि इस मुद्दे पर राज्य सरकार स्तर पर नगर निगम ने क्या प्रयास किए।
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🔴 प्रस्ताव पर उलझे दोनों पक्ष
अधिकारियों के जवाब के बाद शिवसेना के गुटनेता दुर्गेश काठोठीवले ने स्पष्ट किया कि यह बताया जाए कि मार्केट का निर्माण पुराने प्रस्ताव के अनुसार होगा या नया प्रस्ताव लाया जा रहा है। इसी मुद्दे पर भाजपा और शिवसेना के पार्षद आमने-सामने आ गए और बहस तेज हो गई।
भाजपा पार्षद महावीर ढक्का ने शिवसेना के कार्यकाल में मार्केट तोड़े जाने के निर्णय पर सवाल उठाए। वहीं शिवसेना की ओर से जवाब दिया गया कि भवन जर्जर और खतरनाक हो चुका था, इसलिए उसे हटाना जरूरी था। साथ ही भाजपा पर भी सवाल उठाया गया कि इतने वर्षों में पुनर्निर्माण क्यों नहीं किया गया।
🔴 गोरंट्याल-खरे के बीच तीखी नोकझोंक
मामला उस समय और बिगड़ गया जब भाजपा पार्षद अक्षय गोरंट्याल और शिवसेना के विरोधी पक्ष नेता कमलेश खरे के बीच तीखी बहस हो गई। दोनों के बीच बढ़ते विवाद को देखते हुए अन्य पार्षदों को बीच-बचाव करना पड़ा।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उपमहापौर राजेश राऊत को अपनी सीट छोड़कर हस्तक्षेप करना पड़ा और दोनों नेताओं को शांत कराया गया। महापौर वंदना मगरे ने भी सख्त रुख अपनाते हुए सभी सदस्यों को अनुशासन बनाए रखने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि यदि हंगामा जारी रहा तो बैठक स्थगित कर दी जाएगी।
🔴 आयुक्त ने बीच में छोड़ी बैठक
इस बीच नवनियुक्त आयुक्त अंजली शर्मा ने पदभार संभालने के बाद पहली बार आम सभा में हिस्सा लिया, लेकिन हंगामे के बीच उन्होंने महापौर से अनुमति लेकर एक जरूरी बैठक का हवाला देते हुए सभा बीच में ही छोड़ दी।
🔴 सियासी टकराव जारी रहने के संकेत
गौरतलब है कि नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी का बहुमत है, जबकि शिवसेना मुख्य विपक्ष की भूमिका में है। ऐसे में दोनों दलों के बीच राजनीतिक टकराव लगातार सामने आ रहा है।
- महाराष्ट्र सरकार आधिकारिक वेबसाइट: https://www.maharashtra.gov.in
- शहरी विकास विभाग जानकारी: https://urban.maharashtra.gov.in
निष्कर्ष:
महात्मा फुले मार्केट का मुद्दा अब सिर्फ विकास का नहीं, बल्कि सियासी प्रतिष्ठा का विषय बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक गर्मी बढ़ने की संभावना है।


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