“मुख्यमंत्री के आदेश भी नहीं मान्य?”—जालना में भाजपा पर बरसे अर्जुन खोतकर, गठबंधन को लेकर दिया सख्त अल्टीमेटम
जालना।
जालना महानगरपालिका चुनाव से पहले जिले की राजनीति में अचानक तीखापन आ गया है। शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक अर्जुन खोतकर ने भाजपा के स्थानीय नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए ऐसा सवाल उठाया है, जिसने सत्तारूढ़ गठबंधन की अंदरूनी खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है। खोतकर ने दो टूक शब्दों में कहा, “अगर मुख्यमंत्री के आदेश भी नहीं माने जाते, तो क्या कुछ नेता खुद को मुख्यमंत्री से भी ऊपर समझने लगे हैं?” उनके इस बयान ने जालना की राजनीति में खलबली मचा दी है और भाजपा–शिवसेना गठबंधन के भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
गठबंधन पर असमंजस, भाजपा को स्पष्ट संदेश
विधायक अर्जुन खोतकर ने स्पष्ट किया कि यदि भाजपा की इच्छा है, तो उसे जालना महानगरपालिका चुनाव अपने दम पर लड़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि शिवसेना की ओर से भाजपा को गठबंधन का प्रस्ताव दिया गया है और फिलहाल उसके जवाब की प्रतीक्षा की जा रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि तय समय में भाजपा की ओर से कोई स्पष्ट उत्तर नहीं आता है, तो शिवसेना को मजबूरन भाजपा को अल्टीमेटम देना पड़ेगा। खोतकर के इस बयान से साफ है कि शिवसेना अब अनिश्चितता की स्थिति में अधिक समय तक नहीं रहना चाहती।
महापौर पद पर शिवसेना का दावा
महापौर पद को लेकर अर्जुन खोतकर ने शिवसेना की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी। उन्होंने कहा कि जालना महानगरपालिका में शिवसेना के महापौर पद के उम्मीदवार की घोषणा करने का अधिकार उन्हें प्राप्त है। साथ ही उन्होंने भाजपा को सलाह दी कि वह अपने महापौर पद के उम्मीदवार को स्वयं तय करे। खोतकर ने पूरे आत्मविश्वास के साथ दावा किया कि आगामी महानगरपालिका चुनाव के बाद जालना का महापौर शिवसेना का ही बनेगा।
कैलाश गोरंट्याल को लेकर नरमी के संकेत
पूर्व विधायक कैलाश गोरंट्याल को लेकर पूछे गए सवाल पर अर्जुन खोतकर ने अपेक्षाकृत नरम और सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए दोनों पक्षों की ओर से प्रयास आवश्यक होते हैं। खोतकर ने स्पष्ट किया कि कैलाश गोरंट्याल को लेकर उनके मन में कोई कटुता नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि अब जब कैलाश गोरंट्याल गठबंधन में शामिल हो चुके हैं, तो पुरानी कड़वाहट को लंबे समय तक बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या अर्जुन खोतकर और कैलाश गोरंट्याल के बीच चली आ रही राजनीतिक तल्खी अब समाप्त होने की ओर है।
शिवसेना का आक्रामक रुख, बड़ा फैसला संभव
कुल मिलाकर, अर्जुन खोतकर के इस बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि जालना महानगरपालिका चुनाव को लेकर शिवसेना आक्रामक रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। गठबंधन को लेकर अब गेंद भाजपा के पाले में है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कोई बड़ा और निर्णायक राजनीतिक फैसला लिया जा सकता है, जिसका असर जालना की राजनीति पर दूरगामी रूप से देखने को मिलेगा।

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