शशि थरूर: केरल में सोमवार को यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी VD Satheesan के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हो गया। शपथ ग्रहण समारोह तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में बेहद भव्य तरीके से आयोजित किया गया। इस मौके पर राष्ट्रीय राजनीति के कई बड़े चेहरे मौजूद रहे। Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi Vadra और Mallikarjun Kharge जैसे शीर्ष नेता मंच पर दिखाई दिए। UDF की इस वापसी को राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि पिछले दस वर्षों से सत्ता लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के पास थी। शपथ समारोह के दौरान माहौल पूरी तरह उत्सव जैसा रहा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा गया।
नई कैबिनेट का गठन और वरिष्ठ नेताओं को मिली जगह
नई सरकार में कई अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं को मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है। वीडी सतीशन की कैबिनेट में रमेश चेन्निथला, सनी जोसेफ और के मुरलीधरन जैसे अनुभवी नेताओं को शामिल किया गया है। मंत्रिमंडल का गठन गठबंधन के भीतर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर किया गया है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि यह टीम राज्य के विकास और स्थिर शासन के लिए बनाई गई है। सरकार बनने के बाद विभागों के बंटवारे की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी की जा रही है और आने वाले दिनों में और विस्तार की संभावना जताई जा रही है।
शशि थरूर की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का विषय
इस पूरे समारोह में सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात ने खींची, वह थी कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor की अनुपस्थिति। थरूर मंच पर नजर नहीं आए, जिससे राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गईं। हालांकि उन्होंने पहले ही सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया था कि वह अमेरिका में एक पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के कारण शामिल नहीं हो पाएंगे। वे उस समय बोस्टन में टफ्ट्स यूनिवर्सिटी के फ्लेचर स्कूल में भाषण देने और 50वीं वर्षगांठ समारोह में शामिल होने गए हुए थे। थरूर ने यह भी कहा था कि यह उनके लिए एक शैक्षणिक प्रतिबद्धता है जिसे टाला नहीं जा सकता।
राजनीतिक संदेश और UDF की बड़ी जीत का असर
UDF की यह जीत केरल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ मानी जा रही है, जहां गठबंधन ने 140 में से 102 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया है। इस जीत के साथ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की दस साल पुरानी सत्ता का अंत हो गया है। विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार के सामने अब जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की बड़ी चुनौती है। वहीं थरूर की अनुपस्थिति को लेकर भले ही उन्होंने स्पष्ट कारण बताया हो, लेकिन राजनीतिक चर्चाएं अभी भी थमी नहीं हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी के भीतर इसका क्या असर पड़ता है और नेतृत्व इस स्थिति को कैसे संभालता है।
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