जालना — जालना शहर के हजारों झोपड़पट्टीवासियों के लिए शनिवार का दिन उम्मीद की नई किरण लेकर आया। बरसों से अपने सिर पर छत तो थी, मगर उस पर अनिश्चितता की तलवार झूल रही थी — न घर का कानूनी अधिकार, न सुरक्षा। आज राज्य सरकार की पहल से यह अनिश्चितता दूर होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है: झोपड़पट्टीवासियों को जल्द ही पीआर कार्ड (Property Rights Card) दिए जाने की प्रक्रिया शुरू हो रही है।

चंदनझिरा में आयोजित कार्यक्रम में पर्यावरण एवं पशुसंवर्धन मंत्री व जिल्हा पालकमंत्री पंकजा मुंडे ने सर्वेक्षण अभियान का शुभारंभ किया और कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे द्वारा किया गया निर्णय झोपड़पट्टीवासियों को स्थायी राहत देगा। मंत्री मुंडे ने भावुक अंदाज़ में कहा कि यह केवल कागज़ पर अधिकार नहीं, बल्कि गरीबों के सम्मान और आत्मसम्मान का प्रश्न है।

उन्होंने बताया कि जालना की कुल 42 झोपड़पट्टियों में रहने वाले परिवारों का सर्वेक्षण कर उन्हें पीआर कार्ड दिए जाएंगे। पीआर कार्ड मिलने से परिवारों को घर का कानूनी स्वामित्व प्राप्त होगा और बैंक कर्ज, घरकुल अनुदान तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का मार्ग खुल जाएगा।

कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री रावसाहेब पाटील दानवे, पूर्व मंत्री बबनराव लोणीकर, भाजपा जिलाध्यक्ष व विधायक नारायणराव कूचे, पंचायत राज समिति अध्यक्ष संतोष पाटील दानवे, पूर्व विधायक कैलास गोरंटयाल सहित कई जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद थे। रावसाहेब दानवे ने कहा कि यह निर्णय केवल जमीन का अधिकार नहीं, बल्कि गरीबों को स्थायी जीवन की सुरक्षा देने वाला कदम है।

पूर्व विधायक कैलास गोरंटयाल ने बताया कि सर्वेक्षण का काम शीघ्र पूरा कर अगले तीन महीनों के भीतर पीआर कार्ड वितरण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इससे झोपड़पट्टी में रहने वाले परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने के साथ आर्थिक समावेशन के नए रास्ते खुलेंगे।

कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित लोगों की आंखों में राहत और उम्मीद के आंसू थे। महिलाएं कह रही थीं कि अब उनके बच्चों के लिए सुरक्षा और सम्मान होगा, और बुज़ुर्गों के चेहरे पर संतोष झलक रहा था। यह पहल जालना के हजारों परिवारों के जीवन में स्थायित्व और सम्मान लौटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।