“उद्घाटन समारोहों से बाहर रखने की परंपरा अर्जुन खोतकर ने ही शुरू की” — पूर्व विधायक कैलाश गोरंट्याल का पलटवार, बोले – “जिसे जो करना है, वह करे”
जालना, 27 अक्टूबर (संवाददाता): जालना की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट बढ़ गई है। पूर्व मंत्री अर्जुन खोतकर और पूर्व विधायक कैलाश गोरंट्याल के बीच चल रही बयानबाजी अब खुलकर सामने आ गई है। मामला पीआर कार्ड सर्वेक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह से जुड़ा है, जहां लगाए गए बोर्ड से अर्जुन खोतकर का नाम हटाया गया। इस घटना के बाद खोतकर समर्थकों ने जमकर विरोध किया और कार्यक्रम स्थल पर लगे बोर्ड को फाड़कर उस पर काली स्याही पोत दी।
इसके बाद अर्जुन खोतकर ने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा था कि उन्हें जानबूझकर कार्यक्रम से दूर रखा जा रहा है।
कैलाश गोरंट्याल का पलटवार: “उद्घाटन से दूर रखने की परंपरा खोतकर ने ही शुरू की”
इस आरोप का जवाब देते हुए भाजपा नेता और पूर्व विधायक कैलाश गोरंट्याल ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा —
“कार्यक्रमों में किसी को नहीं बुलाने की परंपरा खुद अर्जुन खोतकर ने शुरू की थी। जब विसर्जन कुंड का उद्घाटन हुआ था, तब उन्होंने जिले की पालकमंत्री पंकजा मुंडे को क्यों नहीं बुलाया?”
गोरंट्याल ने कहा कि जो आज खुद को उपेक्षित बता रहे हैं, उन्होंने ही पहले दूसरों को दरकिनार किया था।
“जिसे जो करना है, वह करे” — गोरंट्याल की तीखी प्रतिक्रिया
अर्जुन खोतकर ने हाल ही में सांसद कल्याण काळे के दिवाली स्नेहमिलन कार्यक्रम में भाग लेते हुए कहा था कि “मेरे लिए सभी विकल्प खुले हैं।”
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कैलाश गोरंट्याल ने कहा —
“जिसे जो करना है, वह करे। जनता सब देख रही है। हम भाजपा के सिद्धांतों और विकास कार्यों के साथ हैं और रहेंगे।”
उन्होंने कहा कि खोतकर के ऐसे बयान केवल राजनीतिक अस्थिरता दिखाते हैं।
“पीआर कार्ड का श्रेय सिर्फ भाजपा को जाता है”
गोरंट्याल ने स्पष्ट कहा कि जालना के नागरिकों को पीआर कार्ड दिलाने का पूरा श्रेय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जाता है।
“बहुत जल्द नागरिकों के हाथों में पीआर कार्ड होंगे। यह भाजपा सरकार की योजनाबद्ध कार्यप्रणाली का परिणाम है, किसी और का नहीं,”उन्होंने कहा।
जालना की राजनीति में बढ़ी हलचल
कैलाश गोरंट्याल और अर्जुन खोतकर के बीच यह तीखी बयानबाजी जालना की राजनीति को एक बार फिर सुर्खियों में ले आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों नेताओं के बीच पुरानी प्रतिस्पर्धा अब खुले रूप में सामने आ चुकी है और आने वाले चुनावों में इसका असर देखने को मिलेगा।
– रिपोर्ट: न्यूज नेशन ऑनलाइन

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