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जालना में भाजपा–शिंदे सेना की युति टूटी | गोरंट्याल बनाम अर्जुन खोतकर | मनपा चुनाव 2025

जालना में भाजपा–शिंदे सेना की युति टूटी, कैलाश गोरंट्याल और अर्जुन खोतकर फिर आमने-सामने

जालना:
जालना शहर की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ आ गया है। बीते तीन दिनों से भाजपा और शिंदे गुट की शिवसेना के बीच चल रही मैराथन बैठकों का दौर आखिरकार किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका और सीट-बंटवारे के विवाद ने भाजपा–सेना की युति को तोड़ दिया। युति टूटने के औपचारिक ऐलान के साथ ही जालना में राजनीतिक वर्चस्व की जंग खुलकर सामने आ गई है।

युति टूटने के बाद जहां भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है, वहीं शिंदे गुट अब अपनी अगली रणनीति तय करने में जुट गया है। भाजपा खेमे में यह विश्वास जताया जा रहा है कि यह “पहली सियासी जंग” भाजपा जीत चुकी है और जालना महानगरपालिका का पहला महापौर भाजपा का ही होगा।

सीट-बंटवारे पर फंसा मामला

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, भाजपा को 35 और शिंदे गुट की सेना को 30 सीटें देने पर लगभग सहमति बन चुकी थी। अंतिम चरण में कुछ ऐसे वार्ड सामने आए, जहां भाजपा के मौजूदा नगरसेवकों की जगह शिंदे गुट के उम्मीदवारों को टिकट देने की मांग की गई। इसी मुद्दे ने विवाद को जन्म दिया और सहमति टूट गई।

इस पर पूर्व विधायक कैलाश गोरंट्याल ने कड़ा रुख अपनाते हुए युति समाप्त होने की घोषणा कर दी। उन्होंने साफ कहा कि अब भाजपा जालना की सभी 65 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ेगी और किसी भी प्रकार के दबाव में समझौता नहीं करेगी।

गोरंट्याल का दावा: भाजपा की स्थिति मजबूत

पूर्व विधायक कैलाश गोरंट्याल ने स्पष्ट किया कि उन्हें महायुति से कभी कोई आपत्ति नहीं रही। हाल ही में राकांपा के महायुति से अलग होने के बाद भाजपा–सेना की युति लगभग तय मानी जा रही थी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा अकेले ही 45 सीटों पर जीत दर्ज करने की क्षमता रखती है।

गोरंट्याल के अनुसार, विवाद उन वार्डों पर हुआ जहां पूर्व कांग्रेसी और वर्तमान में भाजपा में शामिल प्रभावशाली नगरसेवकों का दबदबा है। ये नगरसेवक अपने प्रभाव से कई वार्डों में जीत दिलाने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में इन सीटों पर किसी भी तरह का समझौता संभव नहीं था। उन्होंने युति टूटने के लिए शिंदे गुट के अड़ियल रुख को जिम्मेदार ठहराया।

संख्या बल भी बना अहम कारण

राजनीतिक तौर पर यह भी महत्वपूर्ण है कि कैलाश गोरंट्याल हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं और उनके साथ कांग्रेस के 24 मौजूदा नगरसेवक भी भाजपा में आए हैं। दूसरी ओर, शिंदे गुट की सेना के पास इस समय 12 मौजूदा नगरसेवक हैं। इस समीकरण ने भी सीट-बंटवारे की बातचीत को और जटिल बना दिया।

आमने-सामने गोरंट्याल बनाम खोतकर

युति टूटने के बाद जालना में सियासी मुकाबला अब सीधे तौर पर पूर्व विधायक कैलाश गोरंट्याल और शिंदे गुट के विधायक अर्जुन खोतकर के खेमों के बीच सिमट गया है। दोनों नेताओं के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा और राजनीतिक भविष्य से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी महानगरपालिका चुनाव दोनों नेताओं के करियर के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। जहां भाजपा को जालना में मजबूत स्थिति में देखा जा रहा है, वहीं विधायक अर्जुन खोतकर पहले ही ‘शहर विकास आघाड़ी’ के रूप में अपना ‘बी-प्लान’ सार्वजनिक कर चुके हैं।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जालना की सियासी बिसात पर आखिर किसे जीत मिलेगी और किसे राजनीतिक मात का सामना करना पड़ेगा।

Breaking news graphic about the political alliance break in Jalna between BJP and Shinde faction, featuring images of Kailash Gorantyal and Arjun Khotkar.

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