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शिक्षा से ही तरक्की का रास्ता: इस्लाह-ए-मुआशरा कॉन्फ्रेंस जालना | मुफ़्ती आरिफ़ रज़ा अजहरी

शिक्षा से ही तरक्की और कामयाबी का रास्ता: मुफ़्ती आरिफ़ रज़ा अजहरी

जमात रज़ा ए मुस्तफ़ा द्वारा इस्लाह-ए-मुआशरा कॉन्फ्रेंस जालना, संपन्न

जालना: जमात रज़ा ए मुस्तजालना में सुन्नी तरबियती इज्तेमा संपन्न | नमाज़ पर मुफ्ती अल्लाह बख़्श अमजदी का मार्गदर्शनफ़ा की ओर से रविवार को ज़मज़म मस्जिद के पास, आरिफ कॉलोनी, जालना में जश्न-ए-ख़त्मुल क़ुरआन और इस्लाह-ए-मुआशरा कॉन्फ्रेंस का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शाम 8 बजे से रात 11 बजे तक चला, जिसमें बड़ी संख्या में मर्दों और औरतों ने शिरकत की। सम्मेलन के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान मुफ़्ती आरिफ़ रज़ा अजहरी रहे।

क़ुरआन की तालीम से दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी

अपने प्रभावशाली संबोधन में मुफ़्ती आरिफ़ रज़ा अजहरी ने कहा कि तालीम ही इंसान की तरक्की की असली कुंजी है उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनियावी कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों में सीमित विषय पढ़ाए जाते हैं, जबकि क़ुरआन में जीवन के हर पहलू से जुड़ा इल्म मौजूद है। इसलिए क़ुरआन को सिर्फ़ पढ़ना नहीं, बल्कि उसे समझकर अपनी ज़िंदगी में उतारना ज़रूरी है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि बच्चों की अच्छी तालीम और सही परवरिश की शुरुआत बचपन से की जाए, तो समाज में अपने आप सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगते हैं।

दीनी तालीम के साथ आधुनिक शिक्षा पर भी ज़ोर

मुफ़्ती साहब ने दुरूद शरीफ़ की अहमियत, माँ-बाप की इज़्ज़त, नमाज़ की पाबंदी और रमज़ान के महीने की क़द्र पर विस्तार से रोशनी डाली। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को मोहब्बत-ए-रसूल ﷺ के साथ-साथ डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक जैसे आधुनिक और सम्मानजनक पेशों के लिए भी तैयार करना चाहिए, ताकि वे समाज और देश की तरक्की में योगदान दे सकें।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने लोगों से गुनाहों से बचने, नियमित नमाज़ अदा करने और इस्लामी मूल्यों पर अमल करने का संकल्प भी कराया।

मदरसे के बच्चों की शानदार प्रस्तुतियाँ

इस मौके पर मदरसा अहले सुन्नत ज़मज़म के बच्चों ने दीनी और इल्मी विषयों पर बेहतरीन प्रस्तुतियाँ पेश कर सबका दिल जीत लिया। नाज़िरा क़ुरआन मुकम्मल करने वाले चार बच्चों को मुफ़्ती साहब के हाथों सम्मानित किया गया और उन्हें इनामात भी दिए गए।

नात, दुआ और लंगर के साथ समापन

कार्यक्रम में नात-ए-रसूल ﷺ फारूक़ रज़ा मेमन ने पेश की, जबकि संचालन मौलाना अमीन रज़ा ने किया। अंत में पूरी दुनिया में अमन-चैन, तरक्की और कामयाबी के लिए सामूहिक दुआ की गई। इसके बाद लंगर-ए-इमाम-ए-आज़म तक़सीम किया गया।

उलेमा और समाज के लोगों की सक्रिय भागीदारी

इस अवसर पर मुफ़्ती अल्लाह बख़्श अमजदी, मुफ़्ती ग़ुलाम नबी अमजदी, मौलाना दिलावर हुसैन रज़वी, हाफ़िज़ व क़ारी अमजद रज़वी, मौलाना अरबाज़ रज़ा हनफ़ी, हाफ़िज़ अमान बाग़बान, हाफ़िज़ वली अहमद रज़वी सहित कई उलेमा मौजूद रहे। बड़ी तादाद में लोगों ने कार्यक्रम में भाग लिया और खास तौर पर बच्चों की शैक्षिक प्रस्तुतियों की सराहना की।

कार्यक्रम को सफल बनाने में जमात रज़ा ए मुस्तफ़ा जालना के सदस्यों और आरिफ कॉलोनी के युवाओं ने अहम भूमिका निभाई।

Logo of Jamaat Raza-e-Mustafa featuring a stylized mosque dome and minarets, with text indicating its founding year of 1920 and location in Bareilly Shareef, India.
Jamaat Raza e Mustafa

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