जालना: घाणेवाड़ी जलाशय संवर्धन और जल निकासी संरचना की बिगड़ी स्थिति पर चर्चा
सांसद कल्याण काळे मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे, 50 से अधिक सामाजिक संस्थाओं ने लिया हिस्सा
जालना, 31 अगस्त 2025 – जालना शहर के लिए वर्षों से वरदान साबित हो रहे घाणेवाड़ी जलाशय (संत गाडगेबाबा तालाब) के संरक्षण और संवर्धन का मामला अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है। साथ ही टूटे हुए जल निकासी ढांचे की स्थिति भी गंभीर चिंता का विषय है। इस विषय पर सांसद कल्याण काळे ने बताया कि जलाशय की गंभीर स्थिति को लेकर नूतन जिल्हाधिकारी को पत्र लिखा गया है और वे सीधे मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस मामले की गंभीरता को सामने लाएंगे।
सांसद कल्याण काळे ने कहा कि जालना शहर और जिले में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सभी को मिलकर विभिन्न प्लेटफॉर्म पर काम करना होगा और प्रशासनिक मामलों में दबाव समूह बनाने की आवश्यकता है। इसके लिए प्रत्येक महीने बैठक आयोजित कर विचार-मंथन किया जाएगा और आगे की दिशा तय की जाएगी।
शनिवार, 30 अगस्त को आईसीटी कॉलेज सभागृह में 50 से अधिक सामाजिक संस्थाओं, व्यापारियों और उद्योजकों के साथ जलसंरक्षण और पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा की गई। मंच पर महिको चेयरमैन राजेंद्र बारवाले, कलश सीड्स के समीर अग्रवाल, घाणेवाड़ी जलसंरक्षण मंच के रमेशभाई पटेल, और कुंडलिका-सीना पुनरूज्जीवन अभियान के सुनील रायठठा उपस्थित थे।
चर्चा के दौरान जलसंरक्षण, नदी संवर्धन, जलाशय की ऊंचाई और जल निकासी ढांचे की स्थिति, पानी की कमी, हरित क्षेत्र विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। उपस्थित लोगों ने समाधान सुझाए, जिनमें नदी संरक्षण के लिए ब्लू और रेड लाइन मार्किंग और वृक्षारोपण शामिल हैं।
मुख्य बिंदु
- सेवानिवृत्त अभियंता रघुनाथ कल्याणकर ने चेताया कि जलाशय कभी भी टूट सकता है, जलाशय की ऊँचाई छह मीटर कम हो चुकी है और जल निकासी ढांचे की हालत भी गंभीर है।
- रमेशभाई पटेल ने बताया कि गाळ उपसा कार्य लगातार चल रहा है, लेकिन जल निकासी ढांचे में गळती होने से बड़े नुकसान का खतरा है।
- सुनील रायठठा ने बताया कि जलाशय किसी की निजी संपत्ति नहीं है, इसलिए इसे सक्षम अधिकारियों के पास हस्तांतरित किया जाना चाहिए।
- शिवरतन मुंदडा ने तालुका स्तर पर नदी जोड़ परियोजना की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की सतह बढ़ सकती है।
सांसद कल्याण काळे ने कहा कि सामाजिक संस्थाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। जलसंरक्षण, पर्यावरण, स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि क्षेत्रों में नियमित बैठकों के माध्यम से कार्यों का पालन किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि टूटे हुए जल निकासी ढांचे की मरम्मत न होने पर बड़ा खतरा है, इसलिए मुख्यमंत्रियों तक यह मुद्दा तुरंत पहुंचाया जाएगा।

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