शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म, गर्भवती होने पर आरोपी ने उम्र छिपाकर पुलिस और अदालत को किया गुमराह
जालना: महाराष्ट्र के जालना जिले के बदनापुर थाना क्षेत्र में शादी का झांसा देकर एक युवती के साथ दुष्कर्म करने का गंभीर मामला सामने आया है। युवती के चार माह की गर्भवती होने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। मामले की जांच के दौरान आरोपी ने खुद को नाबालिग साबित करने के लिए पुलिस और अदालत को गुमराह करने की कोशिश की, जिसके लिए उसने कथित रूप से फर्जी जन्म प्रमाणपत्र तक प्रस्तुत कर दिया।
यह मामला अब जालना जिले में चर्चा का विषय बन गया है और पुलिस आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म के साथ-साथ फर्जी दस्तावेज पेश करने के मामले की भी जांच कर रही है।
शादी का वादा कर बनाए शारीरिक संबंध
प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी ने युवती को शादी का वादा किया था। इसी भरोसे में आकर युवती ने उसके साथ संबंध बनाए।
कुछ समय बाद युवती चार माह की गर्भवती हो गई। जब उसने आरोपी से शादी करने की बात कही तो आरोपी ने साफ तौर पर इनकार कर दिया। इसके बाद युवती को अपने साथ हुए धोखे का एहसास हुआ और उसने बदनापुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
अदालत में पेशी और न्यायिक हिरासत
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को 3 मार्च 2026 को जालना स्थित जिला न्यायाधीश–3 के न्यायालय में पेश किया गया। अदालत ने आरोपी को 5 मार्च 2026 तक पुलिस हिरासत में भेजा, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में जालना जेल भेज दिया गया।
इसी दौरान आरोपी ने अदालत में एक डुप्लीकेट जन्म प्रमाणपत्र पेश किया। इस प्रमाणपत्र में उसकी जन्मतिथि 25 सितंबर 2009 दर्शाई गई थी।
इसके आधार पर आरोपी ने अदालत में खुद को लगभग 17 वर्ष का नाबालिग बताने की कोशिश की, जिससे मामला बाल न्याय प्रणाली में स्थानांतरित हो सके।
बाल न्याय मंडल में हुई सुनवाई
आरोपी के नाबालिग होने के दावे को देखते हुए उसे 3 मार्च 2026 को जालना जेल से बाल न्याय मंडल (Juvenile Justice Board) जालना के समक्ष पेश किया गया।
यहां प्रमुख न्यायदंडाधिकारी रुबीना एन. मुजावर ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी को बाल निरीक्षण गृह में रखने के निर्देश दिए।
साथ ही जांच अधिकारी को आरोपी का मूल जन्म प्रमाणपत्र तथा प्रवेश निगम उतारा अदालत में प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया।
असली जन्मतिथि सामने आई
जांच के दौरान पुलिस ने संबंधित दस्तावेजों की जांच की। इसके बाद 9 मार्च 2026 को अदालत में आरोपी के मूल दस्तावेज पेश किए गए।
इन दस्तावेजों में आरोपी की वास्तविक जन्मतिथि 25 सितंबर 2007 पाई गई। इसके आधार पर उसकी उम्र 18 वर्ष 4 माह साबित हुई।
इस तरह आरोपी द्वारा अदालत में पेश किया गया 2009 का जन्म प्रमाणपत्र फर्जी निकला और उसकी साजिश का पर्दाफाश हो गया।
कोर्ट ने विस्तृत जांच के दिए आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रमुख न्यायदंडाधिकारी रुबीना एन. मुजावर ने आरोपी को आगे की कार्रवाई के लिए जिला न्यायाधीश–3 तथा विशेष पॉक्सो न्यायालय के न्यायाधीश कृपेश व्ही. मोरे के समक्ष भेजने का आदेश दिया।
अदालत ने जांच अधिकारी को पूरे मामले की विस्तृत जांच करने और आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म के साथ फर्जी दस्तावेज पेश करने के मामले में भी अपराध दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले में सरकार की ओर से सरकारी वकील वर्षा मुकीम पैरवी कर रही हैं।
फर्जी दस्तावेज बनाने में किसकी मदद?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी को फर्जी जन्म प्रमाणपत्र तैयार करने में किसकी मदद मिली।
अगर जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
जिले में चर्चा का विषय बना मामला
शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, युवती का गर्भवती होना और उसके बाद आरोपी द्वारा अपनी उम्र छिपाकर अदालत और पुलिस को गुमराह करने की कोशिश के कारण यह मामला पूरे जालना जिले में चर्चा का विषय बन गया है।
पुलिस अब मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है और जल्द ही इस प्रकरण में आगे की कानूनी कार्रवाई होने की संभावना है।

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