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हास्य-व्यंग्य की बौछार से गूंजा जालना: कवी संमेलन में ठहाकों से लोटपोट हुए श्रोता

हास्य-व्यंग्य की बौछार से गूंजा जालना: कवी संमेलन में ठहाकों से लोटपोट हुए श्रोता

जालना: होली के उपलक्ष्य में माहेश्वरी समाज, जालना एवं आयकॉन स्टील के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हास्य-कवि सम्मेलन ने श्रोताओं को ठहाकों की बारिश में भिगो दिया।

यह आयोजन बुधवार, 12 मार्च को मंठा रोड स्थित ज्वाला लॉन्स में संपन्न हुआ, जहां हास्य और व्यंग्य से भरपूर प्रस्तुतियों ने दर्शकों को लोटपोट कर दिया।

‘वाह वाह क्या बात है’ फेम कवि दीपक दनादन (भोपाल), धर्मेंद्र सोलंकी (भोपाल), दिनेश देहाती (तिरोड़ी), नीलम सोमाणी (रायगढ़) एवं सतीश लखोटिया (नागपुर) जैसे ख्यातनाम कवियों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समां बांधा।

व्यंग्य के तीखे प्रहार, हास्य की झलकियाँ:

कार्यक्रम की शुरुआत नीलम सोमाणी की कविता “माँ शारदा वरदान ऐसा दे, झोली में शब्द का भंडार मुझे दे” से हुई। उनकी “हुस्न जब ग़ज़ल गुनगुनाता है, क़ब्र से इश्क दौड़ते आता है” जैसी रचनाओं ने भावनाओं में रंग भर दिए।

दीपक दनादन ने “ये आज़ादी भ्रष्ट हुई, देश के शैतानों से” जैसी तीखी रचना से व्यवस्था पर व्यंग्य किया। उन्होंने 15 अगस्त पर देशभक्ति कविता और भारत को संस्कारों की भूमि बताया।

 

सतीश लखोटिया की “होली पड़ोसन के साथ” हास्य कविता पर ठहाके गूंज उठे। मोबाइल को “कलयुगी भ्रम का डब्बा” बताते हुए उन्होंने आधुनिक जीवनशैली पर व्यंग्य किया।

धर्मेंद्र सोलंकी ने पीएम मोदी, राहुल गांधी और केजरीवाल पर हास्य-व्यंग्य किया। उनकी रचना “कीचड़ उसके पास था, मेरे पास गुलाल” ने सामाजिक संदेश दिया।

दिनेश देहाती ने ग्रामीण जीवन को भारत की असली संस्कृति बताया। उनकी रचना “हम देहाती ने कड़ी ठंड में फसलों को संभाला न होता…” ने भावुक कर दिया।

कार्यक्रम में दिखा सामाजिक सरोकार:

कवि सम्मेलन में भ्रष्टाचार, महंगाई, संस्कारों में गिरावट, नारी शक्ति, मातृप्रेम और राष्ट्रप्रेम जैसे विषयों पर कविताओं के माध्यम से चर्चा हुई।

कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान महेश व माता सरस्वती की प्रतिमा पूजन से हुआ। कवियों का सम्मान संजय दाड़, ओमप्रकाश मंत्री, विजय राठी, सत्यनारायण सारड़ा, दामोदर बजाज सहित प्रमुख गणमान्यजनों द्वारा किया गया।

आयोजन की सफलता में विनोद बियाणी, शिवरतन मुंदड़ा, अतुल लढ़्ढा, द्वारकादास मुंदड़ा, शाम लखोटिया, प्रा. स्वप्नील सारड़ा, सतीश राठी, सुधीर मंत्री, राजेंद्र मंत्री, महेश सारड़ा, डॉ. आशुतोष सोनी, सुनिल बियाणी, संतोष सारड़ा, निलेश चेचाणी, सुरेश राठी, आर.आर. मंत्री, मनोज बजाज सहित कई सदस्यों का विशेष योगदान रहा।

उद्घाटन समारोह का संचालन प्रा. स्वप्नील सारड़ा ने किया जबकि कवि सम्मेलन का संचालन धर्मेंद्र सोलंकी ने किया। समापन पर आभार माहेश्वरी समाज के सचिव उमेश बजाज ने प्रकट किया।

तीन घंटे चले इस हास्य-व्यंग्य से भरपूर आयोजन ने दर्शकों को ठहाकों की दुनिया में सराबोर कर दिया और इसे एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक संध्या बना दिया।

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Imran Siddiqui

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