आला हज़रत सिर्फ़ इस्लामी इल्म और अमल के माहिर नहीं थे, बल्कि महान साइंटिस्ट भी थे – मुफ्ती अमजदी
जालना : बुधवार, 20 अगस्त 2025 को मस्जिद इमाम अहमद, गांधी नगर जालना में जमात रज़ा ए मुस्तफ़ा, शाखा जालना की ओर से
आला हज़रत इमाम ए अहले सुन्नत इमाम अहमद रज़ा खान (रज़ि.) के 107वें उर्स के अवसर पर विशेष जलसा आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत
जलसे की शुरुआत ज़ुहर की नमाज़ के बाद कुरान की तिलावत, फातिहा और कुल शरीफ के साथ हुई।
मुफ्ती अमजदी का वक्तव्य
“आला हज़रत सिर्फ़ इस्लामी इल्म और अमल के माहिर नहीं थे, बल्कि वे एक महान साइंटिस्ट भी थे।” – मुफ़्ती अल्लाह बख्श अमजदी
उन्होंने बताया कि आला हज़रत ने मात्र 4 साल की उम्र में कुरान का नाजिरा पूरा किया, 6 साल में मिलादुन्नबी पर भाषण दिया,
और 8 साल की उम्र में अरबी में हिदायतुन्नहा पर पुस्तक लिखी।
13 वर्ष की आयु में विभिन्न विद्या और हुनर में महारत हासिल की और 14 वर्ष की उम्र में फतवे लिखना शुरू किया।
उन्होंने एक माह में पूरा कुरान याद कर लिया और हाफ़िज़-ए-कुरान बने। इसके अलावा, केवल आठ घंटों में
अरबी में इल्म-ए-ग़ैब पर पुस्तक लिखी।
आला हजरत का लेखन कार्य अत्यंत विशाल था — 55 से अधिक विषयों में 1000 से अधिक पुस्तकें, जिनमें
कंज़-उल-ईमान, फतवा रज़विया, हदाइक़ बख़्शीश जैसी मशहूर किताबें शामिल हैं।
महिलाओं के लिए विशेष कार्यक्रम
उर्स के अवसर पर गांधीनगर स्थित मदरसा रजा मुस्तफा लीलबनात में दोपहर 2:00 बजे से शाम 4:30 बजे तक
महिलाओं के लिए विशेष जलसा आयोजित किया गया।
इस जलसे में मदरसे की मुअल्लिमा ने आला हज़रत की सीरत पर प्रकाश डालते हुए महिलाओं के परदे,
मजहबी ज्ञान और सामाजिक सुधार पर विशेष ध्यान दिया।
समापन
दोनों जलसों का समापन दुआ और सलातो-सलाम के साथ हुआ, जिसमें दुनिया की अमन व शांति और सुरक्षा के लिए विशेष दुआ की गई।
उपस्थित लोगों ने आला हजरत की शिक्षाओं और योगदान को याद करते हुए सम्मान अदा किया।

